नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय के अधीन केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने आयुष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अनुप्रयोगों पर आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का 30 जनवरी को सफल समापन किया। यह कार्यक्रम 15 दिसंबर से शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य आयुष अनुसंधान में सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना रहा।
इस प्रशिक्षण के लिए प्राप्त 180 आवेदनों में से चयन प्रक्रिया के बाद 33 छात्रों को चुना गया, जो मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर के इंजीनियरिंग संस्थानों से थे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने औषधीय पौधों पर शोध, जैव-सूचना विज्ञान, मेडिकल इमेजिंग, शारीरिक मुद्रा पहचान, प्रकृति मूल्यांकन और पांडुलिपियों की ओसीआर तकनीक जैसी एआई-आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया।
कार्यक्रम ने पारंपरिक आयुष ज्ञान को आधुनिक तकनीकी उपकरणों के साथ जोड़ने का एक संवादात्मक और अंतःविषयक मंच प्रदान किया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं में नवाचार, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक समस्या-समाधान कौशल विकसित हुआ।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रबीनारायण आचार्य ने आयुष क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया और विकसित अनुप्रयोगों को आगे सत्यापन व विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि एआई आयुष को साक्ष्य-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयुष अनुसंधान में क्षमता निर्माण, युवा प्रतिभाओं की भागीदारी और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में सीसीआरएएस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



