नई दिल्ली: अपनी लंबित मांगों को लेकर मोदी सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रमुख संगठन ‘कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स’ (CCGEW) ने 12 फरवरी, 2026 को एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो वे कामकाज ठप करने को मजबूर होंगे।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक विस्तृत मांग पत्र रखा है, जिसमें सबसे प्रमुख बिंदु 8वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन और शर्तों से जुड़े हैं:
20% अंतरिम राहत: कर्मचारियों की मांग है कि जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होतीं, तब तक 1 जनवरी 2026 से सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 20 प्रतिशत अंतरिम राहत (Interim Relief) दी जाए।
OPS की बहाली: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग दोहराई गई है।
DA का विलय: 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA/DR) को मूल वेतन/पेंशन में शामिल करने की मांग की गई है।
कोविड काल का बकाया: कोरोना महामारी के दौरान रोके गए 18 महीने के DA/DR एरियर का तत्काल भुगतान।
अन्य मांगें: अनुकंपा नियुक्तियों पर 5% की सीमा हटाना, खाली पदों को भरना, आउटसोर्सिंग बंद करना और संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण।
8वें वेतन आयोग पर दबाव
नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। CCGEW के महासचिव एस.बी. यादव का कहना है कि वे चाहते हैं कि वेतन और पेंशन संशोधन पर उनके सुझावों को आयोग के ‘नियम और शर्तों’ (ToR) में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर 12 फरवरी को यह हड़ताल होती है, तो डाक विभाग, आयकर विभाग, रेलवे और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। संगठनों का कहना है कि यह एक सांकेतिक चेतावनी है, और यदि सरकार का रुख सकारात्मक नहीं रहा, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



