नई दिल्ली। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम व एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजीत पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया। इसके बाद एक बार फिर भारतीय राजनीति में हवाई सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब किसी बड़े नेता की उड़ान आखिरी साबित हुई हो। इससे पहले भी भारतीय राजनीति में ऐसे कई नाम दर्ज हैं, जिनकी यात्राएं आसमान में ही रह गई।
अहमदाबाद हादसे में रुपाणी की मौत
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय रुपाणी 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुए थे। वे एयर इंडिया के विमान से अपने परिवार से मिलने जा रहे थे। हालांकि, विमान के उड़ान भरते ही हुए हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस दुर्घटना में विमान में सवार 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई। यह हादसा आधुनिक भारत के सबसे भीषण विमान हादसों में गिना गया।
जब रडार से गायब हुए खांडू
साल 2011 में अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू तवांग से ईटानगर की यात्रा पर निकले थे। 56 वर्षीय खांडू का विमान अचानक रडार से गायब हो गया। कई दिनों की तलाश के बाद दुर्घटना की पुष्टि हुई। वर्ष 2007 से अप्रैल 2011 तक मुख्यमंत्री रहे दोरजी खांडू का अंत राज्य के लिए बड़ा आघात था।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की थमी उड़ान
2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी नियमित दौरे पर थे। उनका बेल-430 हेलीकॉप्टर नल्लामाला के घने जंगलों के ऊपर खराब मौसम से जूझ रहा था। अचानक संपर्क टूट गया। बाद में पहाड़ियों के बीच मलबा मिला।
जीएमसी बालयोगी की गई जान
लोकसभा अध्यक्ष रहे जीएमसी बालयोगी 3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश में एक नियमित यात्रा पर थे। भीमावरम से उड़ान भरने के बाद उनका हेलीकॉप्टर कृष्णा जिले के कैकलूर क्षेत्र में तकनीकी कारणों से नियंत्रण खो बैठा और तालाब में जा गिरा। हादसे में उनकी जान चली गई।
माधवराव सिंधिया के लिए मौसम बना काल
30 सितंबर 2001 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया एक राजनीतिक कार्यक्रम के लिए रवाना हुए थे। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी क्षेत्र में खराब मौसम, घने बादल और सीमित दृश्यता ने उनके निजी विमान को दुर्घटनाग्रस्त कर दिया। देश ने एक दूरदर्शी नेता को खो दिया।
जब संजय पर भारी पड़ा जूनून
23 जून 1980 भारतीय राजनीति के सबसे चौंकाने वाले दिनों में दर्ज है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी को उड़ान का शौक था। दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास हवाई करतब दिखाते समय संतुलन बिगड़ा और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने सत्ता के गलियारों में सन्नाटा फैला दिया।
बलवंतराय मेहता की टूटी उड़ान
1960 के दशक में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता कच्छ के रण में हालात का जायजा लेने निकले थे। भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके विमान को पाकिस्तान की ओर से निशाना बनाया गया। इस दुर्घटना में उनकी पत्नी, सहयोगी, एक पत्रकार और क्रू सदस्य भी मारे गए। वे देश के पहले बड़े राजनेता थे, जिनकी मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई।



