कर्नाटक सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीजीपी के. रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन का आदेश उस कथित वीडियो के सामने आने के बाद जारी किया गया, जिसमें अधिकारी को “आपत्तिजनक व्यवहार” करते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है। सरकार ने अपने आदेश में राव के आचरण को “सरकारी सेवक के लिए अनुचित” और “सरकार को शर्मिंदगी में डालने वाला” बताया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निलंबन जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। कथित वीडियो के टेलीविजन और डिजिटल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस पूरे घटनाक्रम पर खेद जताते हुए कहा कि इस मामले ने राज्य प्रशासन को शर्मसार किया है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मैं इस घटना से बेहद परेशान हैं। यह मामला मेरे विभाग से जुड़ा है, इसलिए मुझे व्यक्तिगत रूप से भी अच्छा नहीं लग रहा।”
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने यह वीडियो सोमवार को ही देखा और प्रारंभिक तौर पर यह तीन अलग-अलग क्लिप्स को जोड़कर बनाया गया प्रतीत होता है। उन्होंने गृह विभाग को प्रारंभिक जांच के आदेश दिए और साफ कहा,
“अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, यदि कदाचार पाया गया तो कार्रवाई जरूर होगी।”
आगे और सख्त कार्रवाई के संकेत
गृह मंत्री परमेश्वर ने संकेत दिए कि जांच के बाद और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा, “उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।”
उन्होंने यह भी जोर दिया कि अधिकारी की वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए सरकार ने तुरंत निलंबन का फैसला लिया।
विपक्ष का हमला
भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने रामचंद्र राव की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सरकार पर प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है।
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री एस. सुरेश कुमार ने कथित कृत्य को “शर्मनाक” और “अक्षम्य अपराध” बताया और कहा कि इससे पूरे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री का बयान
राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो वरिष्ठता की परवाह किए बिना “निर्ममता से कार्रवाई” की जाएगी।



