नई दिल्ली: प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में आज दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन महान स्वतंत्रता सेनानी और विधायी नेतृत्वकर्ता वीर विट्ठलभाई पटेल की विरासत पर आधारित कॉफी टेबल बुक “श्री वीर विट्ठल भाई की गौरव गाथा: एक शताब्दी यात्रा” पर केंद्रित था।
इतिहास भविष्य की नैतिक दिशा है: हरिवंश नारायण सिंह
मुख्य अतिथि के रूप में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह ने कहा, “जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, वह न केवल अपना भविष्य खो देता है, बल्कि अपनी नैतिक दिशा भी खो देता है।” उन्होंने वीर विट्ठलभाई पटेल के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने औपनिवेशिक काल में विधायी परिषद के प्रथम भारतीय अध्यक्ष बनकर लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव रखी थी।
हरिवंश जी ने रॉलेट एक्ट के दौरान पटेल द्वारा प्रस्तुत 220 संशोधनों और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति उनके मार्गदर्शन का विशेष उल्लेख किया।
1912-1933: स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक काल
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने वीर विट्ठलभाई पटेल को क्रांतिकारी और संसदीय लोकतंत्र का आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा:
“1912 से 1933 का कालखंड भारत के आंदोलन का सबसे निर्णायक चरण रहा। विट्ठलभाई पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी जैसे दिग्गजों का मार्गदर्शन किया। आने वाले समय में उन्हें स्वतंत्र भारत के प्रमुख शिल्पकारों में गिना जाएगा।”
अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली विधानसभा परिसर को एक सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि युवा पीढ़ी इतिहास से जुड़ सके।
QR कोड का शुभारंभ और अनुपम खेर की आवाज में डॉक्यूमेंट्री
इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इस अवसर पर एक क्यूआर (QR) कोड भी लॉन्च किया गया, जिसके जरिए नागरिक इस गौरव गाथा को डिजिटल रूप से देख सकेंगे। कार्यक्रम में पद्म भूषण अनुपम खेर की आवाज़ में वर्णित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।
विद्वानों का मत
विनय सहस्रबुद्धे: उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसे विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. रमेश चंद्र गौर: उन्होंने विधानसभा भवन को एक जीवंत लोकतांत्रिक स्थल के रूप में देखने और वहां लाइट-एंड-साउंड शो जैसी योजनाएं शुरू करने का सुझाव दिया।
डॉ. मनीषा चौधरी: उन्होंने पुस्तक के शोधपरक पहलुओं जैसे दुर्लभ चित्रों, वित्तीय दस्तावेजों और विधायी कार्यवाहियों की प्रशंसा की।



