श्रीहरिकोटा, 11 जनवरी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का वर्ष 2026 का पहला उपग्रह प्रक्षेपण मिशन पीएसएलवी-सी62 असफल हो गया। सोमवार सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित यह रॉकेट तीसरे चरण में तकनीकी खराबी के कारण अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-09 ‘अन्वेषा’ सहित कुल 15 उपग्रहों को 512 किलोमीटर ऊंची सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाना था, जो पूरा नहीं हो सका।
इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि उड़ान के तीसरे चरण के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई, जिसके कारण मिशन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है और भविष्य के अभियानों में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
भारतीय और विदेशी उपग्रहों का था मिशन
पीएसएलवी-सी62 मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड की निगरानी में संचालित किया जा रहा था। यह इसरो की वाणिज्यिक इकाई का एक अहम अभियान था। इस मिशन में कुल 15 उपग्रह शामिल थे, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी उपग्रह थे। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस के 7 उपग्रह इस रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजे जा रहे थे। विदेशी उपग्रहों में फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम के उपग्रह शामिल थे। यह पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से जुड़ा नौवां वाणिज्यिक मिशन था।
पीएसएलवी की 64वीं उड़ान
इस मिशन के साथ पीएसएलवी रॉकेट अपनी 64वीं उड़ान पूरी करने वाला था। इससे पहले यह रॉकेट 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है और इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यानों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक मिशन प्रक्षेपित किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 मिशन भी तीसरे चरण में तकनीकी खराबी के कारण असफल हो गया था।
अन्वेषा क्यों था अहम
ईओएस-09 ‘अन्वेषा’ एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन और खुफिया उपग्रह है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित किया है। यह हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित है, जिसकी मदद से यह जंगल, झाड़ियों और बंकरों में छिपी गतिविधियों की भी सटीक पहचान कर सकता है। यह उपग्रह रक्षा क्षेत्र, सीमा निगरानी, सैन्य रणनीति, पर्यावरण अध्ययन और प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
इस मिशन की असफलता को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक झटका माना जा रहा है, हालांकि इसरो ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी खामियों से सीख लेकर आगामी अभियानों को और मजबूत बनाया जाएगा।



