नई दिल्ली: भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने नागालैंड चिकित्सा परिषद के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। देश के किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल के साथ यह पहला मौका है जब फार्माकोविजिलेंस (दवा निगरानी) और मैटेरियोविजिलेंस (मेडिकल उपकरण निगरानी) कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए ऐसा समझौता हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक रोगी सुरक्षा पहुंचाना है।
पूर्वोत्तर का पहला और देश का दूसरा समझौता औषधि नियंत्रण प्रशासन के साथ
नागालैंड राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन (NSDCA) के साथ हुआ समझौता पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह का पहला समझौता है। देश में यह IPC का दूसरा ऐसा समझौता है (पहला उत्तर प्रदेश के साथ हुआ था)। इससे दवाओं की गुणवत्ता जांच और निगरानी में भारतीय फार्माकोपिया के मानकों का इस्तेमाल आसान होगा।
राज्य फार्मेसी परिषद के साथ चौथा समझौता
नागालैंड राज्य फार्मेसी परिषद के साथ हुआ समझौता देश का चौथा ऐसा समझौता है। इससे फार्मासिस्टों को दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग की ट्रेनिंग मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया (NFI) को सभी स्वास्थ्य केंद्रों में अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में काम होगा।
क्या होंगे मुख्य फायदे?
इस समझौते से दवाओं या मेडिकल उपकरणों से होने वाली नुकसानदायक घटनाओं (ADR) की रिपोर्टिंग बढ़ेगी, नए ADR और मेडिकल डिवाइस निगरानी केंद्र खुलेंगे, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और ड्रग इंस्पेक्टरों को विशेष ट्रेनिंग मिलेगी, और हर साल राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह मनाया जाएगा। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सुरक्षित दवा प्रणाली पहुंचेगी।
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कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद?
28 नवंबर 2025 को कोहिमा में हुए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव होवेदा अब्बास, नागालैंड के स्वास्थ्य सचिव अनूप खिंची, IPC के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलईसेल्वन और तीनों नागालैंड संस्थाओं के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। यह कदम नागालैंड ही नहीं, पूरे पूर्वोत्तर भारत में दवा सुरक्षा और रोगी सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।



