नई दिल्ली: भारतीय सेना के चाणक्य रक्षा संवाद-2025 का शुभारंभ मानेकशॉ सेंटर में 27 नवंबर 2025 को हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि सीमा पर सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों में विकास के काम भी तेजी से हो रहे हैं। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि साइबर, अंतरिक्ष और ज्ञान-युद्ध जैसे नए क्षेत्रों में सेना को तकनीकी रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने खुशी जताई कि सेना महिलाओं और युवाओं को ज्यादा मौके दे रही है और 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।थल सेनाध्यक्ष ने बताया तीन चरणों का रोडमैपथल सेनाध्यक्ष जनरल ने मुख्य भाषण में सेना के परिवर्तन की पूरी रूपरेखा रखी।
सेना तीन चरणों में खुद को बदल रही है।
उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि सेना तीन चरणों में खुद को बदल रही है। पहला HOP-2032: तुरंत जरूरी बदलाव, दूसरा STEP-2037: मजबूती और एकीकरण और तीसरा JUMP-2047: अगली पीढ़ी की पूरी तरह एकीकृत सेना। इस मौके पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि स्वदेशी हथियार, नई तकनीक, उद्योगों के साथ सहयोग और रक्षा ढांचे में सुधार ही आगे का रास्ता है।75% रक्षा बजट अब देशी कंपनियों कोरक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 2025 को रक्षा मंत्रालय ने सुधार का वर्ष घोषित किया है। अब पूंजी खरीद बजट का 75% हिस्सा सिर्फ भारतीय कंपनियों को मिलेगा, जिसमें निजी क्षेत्र के लिए भी अलग हिस्सा रखा गया है। इससे हथियारों का देश में ही उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा और निर्यात भी बढ़ेगा।तकनीक पर जोर, स्टार्टअप से लेकर बुनियादी विज्ञान तकपूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने कहा कि तीन स्तर पर निवेश जरूरी है। इसमें अभी (0-3 साल): स्टार्टअप और एआई से पुराने हथियारों को नया बनाएं, दूसरा मध्यम अवधि (3-10 साल): सॉफ्टवेयर और महत्वपूर्ण तकनीक पर कब्जा और लंबी अवधि (10-30 साल): बुनियादी विज्ञान में बड़ा निवेश।
नई रक्षा प्रौद्योगिकी परिषद बनाने की सिफारिश
उन्होंने एक नई रक्षा प्रौद्योगिकी परिषद बनाने की भी सिफारिशह की। जनरल अनिल चौहान: दुश्मन को जानो, बिना गलती के रणनीति लागू करोचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने चाणक्य के सिद्धांतों को याद करते हुए कहा कि अब भूगोल से ज्यादा तकनीक युद्ध तय कर रही है। एआई, रोबोट, हाइपरसोनिक मिसाइल और पारदर्शी युद्धक्षेत्र आने वाले हैं। इसलिए सेना को बहु-क्षेत्रीय (जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष) युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने साफ कहा, जो कमांडर बिना किसी कमी के रणनीति लागू करते हैं और सैनिक रोज अभ्यास करते हैं, वही जीतते हैं।पहले दिन तीन अहम सत्रपहले दिन ऑपरेशन सिंदूर: कैसे भारत ने संप्रभु रणनीतिक जीत हासिल की, रक्षा सुधारों को नई ताकत देना और सिविल-सैन्य सहयोग कैसे लाएगा बदलाव जैसे सत्र आयोजित हुए।28 नवंबर को रक्षा मंत्री करेंगे बड़े ऐलानसंवाद का दूसरा दिन 28 नवंबर को होगा जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई नई पहलों की घोषणा करेंगे और विकसित भारत के लिए जरूरी सुधारों पर बड़ा भाषण देंगे।चाणक्य रक्षा संवाद अब रक्षा नीति और भविष्य की रणनीति पर देश का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।



