दिल्ली में शुरू हुआ दो दिवसीय क्षेत्रीय डिजिटल हेल्थ सम्मेलन

दिल्ली में ‘क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025’ का आयोजन किया गया, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने एक साथ मिलकर डिजिटल हेल्थ में अंतर-संचालनीयता (इंटरोपरेबिलिटी) और जेनरेटिव AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया।

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नई दिल्ली। दिल्ली में 19-20 नवंबर को दो दिवसीय ‘क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025’ का उद्घाटन हुआ। सम्मेलन का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-SEARO) और यूनिसेफ ने मिलकर किया है। इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के 11 देशों के नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और स्वास्थ्य नेता इसमें शामिल हुए।

एक ही चुनौती, एक ही समाधान

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने उद्घाटन भाषण में कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की समस्याएं अलग-अलग दिखती है, लेकिन मूल चुनौती एक ही है, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, किफायत और मानव संसाधन की कमी है। उन्होंने कहा कि हमें नागरिक-केंद्रित, एक-दूसरे से जुड़ी हुई और समावेशी डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली चाहिए ताकि सभी को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज मिल सके। उन्होंने भारत के डिजिटल हेल्थ मिशन की सफलता गिनाई, जैसे ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन से 20 करोड़ से ज्यादा मरीजों को फायदा, डायबिटिक रेटिनोपैथी-ओरल कैंसर की AI स्क्रीनिंग और टीबी जोखिम भविष्यवाणी।

जेनरेटिव AI को जिम्मेदारी से अपनाने की अपील

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्णवाल ने कहा कि जेनरेटिव AI डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ा सकता है। लेकिन इसके लिए अच्छी क्वालिटी का डेटा और सभी सिस्टम का आपस में जुड़ना (इंटरोपरेबिलिटी) जरूरी है। उन्होंने ABDM के तहत ABHA नंबर, डिजिटल सहमति व्यवस्था और FHIR स्टैंडर्ड की तारीफ की। ओपन स्टैंडर्ड, ओपन टेक्नोलॉजी, ओपन आर्किटेक्चर और ओपन कंटेंट यानी Full-STAC फॉर्मूला ही भरोसेमंद AI का आधार है।

भारत का मॉडल दुनिया के लिए उदाहरण

समिट में ABDM के मिशन डायरेक्टर किरण गोपाल वास्का ने बताया कि कैसे एक व्यक्ति का ABHA नंबर, रजिस्ट्री, सहमति प्रणाली और FHIR स्टैंडर्ड मिलकर पूरे देश में एक ही नहीं, पड़ोसी देशों में भी डेटा सुरक्षित आदान-प्रदान कर सकते हैं। श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और तिमोर-लेस्ते के प्रतिनिधियों ने भी अपने देशों के अनुभव साझा किए।

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सम्मेलन से क्या उम्मीद?

यह सम्मेलन देश-विशेष डिजिटल हेल्थ रोडमैप तैयार करने, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय स्तर पर डेटा शासन को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। यह सम्मेलन 2024 में नैरोबी में हुए पहले ओपन डिजिटल हेल्थ समिट की कड़ी को आगे बढ़ा रहा है।

Pooja Thakur

pt37557@gmail.com

मीडिया की दुनिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय। वर्तमान में Newg India में बतौर कंटेंट राइटर और मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर काम कर रही हूं, जहां हर कहानी को एक नए नजरिए से पेश करने की कोशिश करती हूं।

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