नई दिल्ली: बिहार के सारण जिले में गंगा नदी पर बना कालूघाट इंटरमॉडल टर्मिनल अब निजी कंपनी के हवाले हो गया है। IWAI ने इसे समिट अलायंस पोर्ट ईस्ट गेटवे (SAPLE) को सौंप दिया। कंपनी टर्मिनल चलाएगी और रखरखाव करेगी। बदले में IWAI को कुल कमाई का 38.30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यह पीपीपी मॉडल है, जिसमें सरकार और निजी कंपनी मिलकर काम करेंगे। इससे टर्मिनल बेहतर चलेगा और इलाके में व्यापार बढ़ेगा।
हल्दिया से असम तक पहला माल रवाना
पश्चिम बंगाल के हल्दिया मल्टी-मॉडल टर्मिनल से पहला कार्गो रवाना हो चुका है। टाटा स्टील की ग्रैनुलेटेड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग (GBFS) की खेप जहाज से गुवाहाटी के पांडु पोर्ट के लिए रवाना हुई। यह टर्मिनल IRC नेचुरल रिसोर्सेज कंपनी चला रही है। सालाना 3.08 मिलियन टन माल संभालने की क्षमता है। इससे पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला सस्ता रास्ता खुलेगा।
सस्ता, तेज और हरा-भरा परिवहन
सड़क और रेल की तुलना में नदी का रास्ता बहुत सस्ता है। एक लीटर डीजल में जहाज 100 टन माल 150 किमी तक ले जा सकता है, जबकि ट्रक सिर्फ 25 किमी। प्रदूषण भी कम होता है। सरकार चाहती है कि 2030 तक माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा नदी से हो। ये दोनों टर्मिनल उसी सपने की दिशा में कदम हैं।
विश्व बैंक की मदद से बना इंफ्रास्ट्रक्चर
कालूघाट और हल्दिया दोनों टर्मिनल जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत बने हैं। विश्व बैंक ने पैसा और तकनीक दी। अब तक गंगा पर 1390 किमी लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग-1 को चुस्त-दुरुस्त किया जा चुका है। नए जेटी, नेविगेशन सिस्टम और 60 से ज्यादा सामुदायिक घाट भी बनाए गए हैं।
निजी कंपनियों से मिलेगी रफ्तार
IWAI के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने कहा कि निजी कंपनियों को टर्मिनल सौंपने से काम में तेजी आएगी। माल लोडिंग-अनलोडिंग तेज होगी और सुविधाएं बेहतर होंगी। उनका कहना है कि इससे गंगा क्षेत्र में व्यापार और रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।
पूर्वोत्तर को सस्ता माल, बिहार को नया बाजार
हल्दिया से असम तक का रास्ता खुलने से पूर्वोत्तर को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। बिहार के कालूघाट से कोयला, अनाज, सीमेंट जैसा माल आसानी से कोलकाता पोर्ट तक जाएगा। इससे किसानों, व्यापारियों और फैक्ट्रियों को फायदा होगा।
हरित लॉजिस्टिक्स का नया अध्याय
दोनों टर्मिनल पर्यावरण के लिए अच्छी खबर हैं। कम डीजल, कम धुआं, कम जाम। सरकार का लक्ष्य है कि नदी को लॉजिस्टिक्स का मजबूत स्तंभ बनाया जाए। कालूघाट और हल्दिया ने उस दिशा में मजबूत शुरुआत कर दी है। अब वाराणसी, साहिबगंज, पटना जैसे दूसरे टर्मिनल भी जल्द निजी हाथों में जाएंगे। आने वाले सालों में गंगा पर जहाजों की चहल-पहल बढ़ेगी और माल ढुलाई का नक्शा बदल जाएगा।



