नई दिल्ली: पंजाब विश्वविद्यालय में हाल ही में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए एक अनिवार्य एफिडेविट जमा करने का आदेश जारी किया था। एफिडेविट में 11 शर्तें शामिल हैं। एफिडेविट की शर्तों की अवहेलना करने वाले छात्रों का दाखिला रद्द करने सहित अन्य कठोर कानूनी अधिकार विवि को मिल जायेगा। वीसी के इसी निर्णय के विरोध में छात्र एकजुट हो गए है। छात्रों का आरोप है कि एफिडेविट छात्रों के विरोध, रैली और धरना करने के मौलिक अधिकारों को सीमित करता है। यह निर्णय अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है।
शपथपत्र संबंधी निर्णय को वापस लेने की मांग
इसी विवादित शपथपत्र संबंधी निर्णय की वापसी और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हेतु अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी से मिला। विद्यार्थी परिषद प्रतिनिधिमंडल ने शपथपत्र संबंधी निर्णय को वापस लेने की मांग उच्च शिक्षा सचिव के समक्ष रखी।
विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने सीनेट से संबंधित मांग रखते हुए कहा कि सीनेट के अंदर छात्र प्रतिनिधित्व को स्थान मिलना चाहिए ताकि विद्यार्थियों की आवाज को प्रशासन के समक्ष और प्रमुखता से उठाया जा सके। इस मांग पर भी उच्च शिक्षा सचिव ने विचार कर पूरा करने का आश्वासन दिया है।
शपथपत्र के पीछे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की मंशा है।
पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष गौरववीर सिंह सोहल ने कहा, इस शपथपत्र के पीछे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की मंशा है। पहले दिन से ही अभाविप ने इस शपथपत्र संबंधी निर्णय का विरोध किया था और कुलपति कार्यालय के बाहर धरना और घेराव भी किया था। अभाविप की प्राथमिकता छात्र हित है और हमने छात्र हित की लड़ाई निरंतर पंजाब विश्वविद्यालय में लड़ी है। इसी क्रम में अभाविप का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय से मिला और विवादित शपथपत्र को वापस लेने की मांग की जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है। शपथपत्र संबंधी निर्णय की वापसी का निर्णय हर छात्र की जीत है और विद्यार्थी परिषद निरंतर ही छात्र हित के लिए कार्य करती रहेगी।
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विश्वविद्यालयों में संवाद, स्वतंत्र अभिव्यक्ति अकादमिक संस्कृति की पहचान है
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, पंजाब विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों पर थोपे गए इस प्रकार के निर्णय छात्रों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार थे। विद्यार्थी परिषद का मानना है कि विश्वविद्यालयों में संवाद, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और भागीदारी ही अकादमिक संस्कृति की पहचान है। ऐसे में पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों पर शपथपत्र थोपना बिल्कुल गलत एवं छात्रों के अधिकारों का हनन करने वाला है। शपथपत्र वापसी के निर्णय से यह सिद्ध हुआ है कि छात्र शक्ति की आवाज प्रभावशाली और निर्णायक होती है।
प्रतिनिधिमंडल में अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री कु. शिवांगी खरवाल , पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष श्री गौरववीर सिंह सोहल,, पंजाब विश्वविद्यालय की छात्रा एवं खेलो भारत की राष्ट्रीय सह संयोजिका कु. अर्पिता मलिक तथा अभाविप के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्री गौरव अत्री उपस्थित रहे।



