नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 326 स्नातकों को डिग्रियां प्रदान कीं और सात वरिष्ठ डॉक्टरों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि कहा कि AIIMS नई दिल्ली ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें समाज की सेवा सहानुभूति, नैतिकता और नवाचार की भावना से करनी चाहिए।

AIIMS का विस्तार
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछली सदी के अंत तक देश में केवल एक AIIMS था, लेकिन आज देशभर में 23 एम्स संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं, जो सरकार की इस दिशा में प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं देश के हर हिस्से तक पहुंचाई जाएं।
मेडिकल कॉलेजों और सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि
नड्डा ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत के मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी तरह, स्नातक (UG) सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और स्नातकोत्तर (PG) सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 75,000 सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सके।
स्वास्थ्य सूचकांकों में ऐतिहासिक सुधार
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, देश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88, शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 रह गई है। इसी तरह पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में क्रमशः 42% और 39% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है।
टीबी पर भी नियंत्रण
उन्होंने कहा कि भारत में टीबी (क्षय रोग) के मामलों में 17.7% की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत 8.3% से दोगुनी तेज दर है। इस उपलब्धि का उल्लेख द लैंसेट रिपोर्ट में भी किया गया है।
नए डॉक्टरों को नड्डा की अपील
जेपीनड्डा ने AIIMS के नए स्नातकों से आह्वान किया कि वे चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने व्यावसायिक जीवन में AIIMS की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर के रूप में उनका कर्तव्य केवल इलाज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में करुणा और नवाचार की भावना को भी बढ़ावा देना चाहिए।
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समारोह में शामिल हुए नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर वीके पॉल ने कहा कि समाज ने जो हमें दिया है, उसे हमें लौटाना चाहिए। उन्होंने कहा – आपकी हर दिन की साधना उत्कृष्टता होनी चाहिए और नवाचार आपका मार्गदर्शक सिद्धांत। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षण और शोध के क्षेत्र में भी योगदान दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को दिशा मिल सके और ‘विकसित भारत’ का सपना साकार हो सके।
326 स्नातकों को मिली डिग्रियां
इस अवसर पर कुल 326 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएचडी स्कॉलर, 95 DM/MCh विशेषज्ञ, 69 MD, 15 MS, 4 MDS, 45 MSc, 30 MSc (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल हैं। साथ ही, सात डॉक्टरों को उनके आजीवन योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।



