नई दिल्ली: भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण के तहत, विधि और न्याय मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स (DLA) एक ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। लीगल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड ब्रीफिंग सिस्टम (LIMBS) को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के साथ जोड़कर, विभाग ने वकीलों के शुल्क भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। यह कदम विशेष अभियान 5.0 के तहत पारदर्शिता, दक्षता और डिजिटल शासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पेपरलेस प्रक्रिया की शुरुआत
पहले, वकीलों को शुल्क भुगतान में मैन्युअल सत्यापन, कागजी दस्तावेज और पे एंड अकाउंट्स ऑफिस में फिजिकल जमा करने की जरूरत पड़ती थी, जिससे देरी और जटिलता बढ़ती थी। अब, LIMBS का उन्नत ई-बिल मॉड्यूल इस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना रहा है। यह मॉड्यूल लॉ ऑफिसर्स और पैनल एडवोकेट्स के लिए शुल्क भुगतान को तेज, पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाता है। प्रत्येक दावे के लिए एक क्लेम रेफरेंस नंबर (CRN) जनरेट होता है, जिससे रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव है। ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के बाद, भुगतान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में PFMS के माध्यम से होता है, बिना किसी फिजिकल फाइल की जरूरत के।
दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य इकाइयों तक विस्तार
फरवरी 2025 में सेंट्रल एजेंसी सेक्शन (CAS) ने LIMBS के माध्यम से पैनल एडवोकेट्स के लिए ई-बिल मॉड्यूल लागू किया। अब विभाग इसे दिल्ली हाई कोर्ट सहित अन्य मुकदमेबाजी इकाइयों तक विस्तार देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, लॉ ऑफिसर्स के नियमित भुगतानों के लिए रिटेनर फी मॉड्यूल बनाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। यह पहल न केवल समय बचाएगी, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग को भी मजबूत करेगी।
डिजिटल शासन और पर्यावरणीय स्थिरता
LIMBS-PFMS एकीकरण से प्रक्रिया में एकरूपता आई है, जिससे शुल्क भुगतान का मानकीकरण संभव हुआ। यह पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देता है, क्योंकि कागजी कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो गई है। यह प्रणाली विशेष अभियान 5.0 के उद्देश्यों को पूरा करती है, जो नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार और डिजिटल परिवर्तन पर जोर देता है।
विकसित भारत की दिशा में
यह सुधार डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स को एक आधुनिक, कुशल और पारदर्शी प्रणाली की ओर ले जा रहा है। भविष्य में, इसे अन्य शुल्क भुगतान श्रेणियों तक विस्तार देने की योजना है, जो विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में योगदान देगी।



