नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को समस्तीपुर पहुंचे थे। उन्होंने अपने 45 मिनट के भाषण में कहा कि नीतीश बाबू के नेतृत्व में NDA जीत के अपने सारे रिकॉर्ड को तोड़ने वाला है। बिहार की जनता इस बार NDA को अब तक सबसे बड़ा जनादेश देगी। हालांकि उन्होंने एक बार भी नीतीश सरकार का नारा नहीं दिया। इसके बाद से सियासी गलियारों में अलग तरह की चर्चा होने लगी है।
संशय की स्थिति
साल 2020 में हर चुनावी मंच से कहा जाता था- अबकी बार नीतीश की सरकार। 23 अक्टूबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी सासाराम में पहली चुनावी रैली करते हैं, जिसमें कहते हैं नीतीश के नेतृत्व वाली सरकार बनानी है। इस बार बीजेपी खुले तौर पर इसे कहने से बच रही है। भाजपा के दो बड़े नेता पीएम मोदी हो या गृह मंत्री अमित शाह, दोनों ने अब तक नीतीश कुमार को सीएम बनाने को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया है। इसके बाद से संशय की स्थिति बन गई है।
शाह का स्टैंड
16 अक्टूबर को एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए अमित शाह ने कहा- मैं कौन होता हूं तय करने वाला कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। अभी हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के बाद विधायक दल का नेता चुना जाएगा। 2020 के चुनाव में बीजेपी की टॉप लीडरशिप हर चुनावी सभा में इसका जिक्र जरूर करती थी कि अबकी बार फिर से नीतीश कुमार।
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पत्ते नहीं खोल रही भाजपा
पार्टी समर्थकों में संशय इसलिए बना हुआ है क्योंकि भाजपा का पिछले ट्रैक रिकॉर्ड सीएम चुनने का अलग था। 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ी लेकिन सीएम बने देवेंद्र फडणवीस। 2023 में मध्य प्रदेश का चुनाव शिवराज सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया लेकिन सीएम बने मोहन यादव। इसी तरह 2021 का असम विधानसभा चनाव लड़ा गया सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में लेकिन सीएम बनाया गगया हिमंत बिस्वा शर्मा को। इसी तरह बिहार में भी इस बार भाजपा अपने पत्ते नहीं खोल रही है।



