पटना: बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए महागठबंधन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। आरजेडी, जो गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, तेजस्वी यादव को विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित करने पर जोर दे रही है। पार्टी का तर्क है कि तेजस्वी की युवा छवि और मुस्लिम-यादव समुदाय में लोकप्रियता को चुनावी फायदे में बदला जा सकता है। हाल के एक सर्वे में तेजस्वी को सबसे लोकप्रिय सीएम चेहरा बताया गया है, जहां उन्हें 36.5 प्रतिशत समर्थन मिला। हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेता इसकी अप्रत्यक्ष पुष्टि कर चुके हैं।
सीएम चेहरे पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की चुप्पी
पटना से कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “तेजस्वी यादव महागठबंधन का सीएम चेहरा हैं। सीट बंटवाड़ा अंतिम चरण में है।” कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी कहा कि तेजस्वी को घोषित करने में कोई हर्ज नहीं है।
फिर भी, आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को चिंता है कि तेजस्वी को चेहरा बनाने से गैर-यादव ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, जो एनडीए के पक्ष में जा सकता है। इसके अलावा, लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी पर आईआरसीटीसी घोटाले में आरोप तय हो गए हैं। कोर्ट फैसले ने उनकी उम्मीदवारी को विवादास्पद बना दिया है।
एनडीए हमलावर है
एनडीए इसे “जंगलराज और भ्रष्टाचार” का प्रतीक बताकर हमला बोल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को “20 साल में सबसे बड़ी जीत” दिलाएगा। सीट बंटवारा महागठबंधन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। आरजेडी 130-135 सीटें चाहती है, जबकि कांग्रेस 60 पर अड़ी हुई है।
वीआईपी और लेफ्ट पार्टियों की मांगें भी बढ़ा रही हैं तनाव।
कई सीटों पर महागठबंधन में “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बन गई है
सूत्रों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दिल्ली में तेजस्वी और कांग्रेस नेताओं की बैठक में 135 सीटें आरजेडी को देने पर सहमति बनी, लेकिन कई विवादित सीटों पर फैसला टल गया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कई सीटों पर गठबंधन के भीतर ही “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बन गई है। बछवाड़ा और रोसड़ा में कांग्रेस और सीपीआई आमने-सामने हैं, जबकि वैशाली और कहलगांव में आरजेडी-कांग्रेस टकराव में हैं। अन्य विवादित सीटें तारापुर, गौरा बौरम, लालगंज, राजापाकर, बिहारशरीफ और वारिसलीगंज हैं।
लालू प्रसाद ने जल्दबाजी में कुछ उम्मीदवारों को टिकट बांट दिए थे, जिसे तेजस्वी ने वापस करवा लिया। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे “महाठगबंधन” करार देते हुए कहा कि गठबंधन में आंतरिक कलह से एनडीए को फायदा हो रहा है। इसके विपरीत, एनडीए ने 12 अक्टूबर को सीट बंटवाड़ा फाइनल कर लिया। भाजपा और जेडीयू को 101-101 सीटें, एलजेपी (रा.वि.) को 29, एचएएम को 6 और आरएलएम को 6 मिलीं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि गठबंधन की एकजुटता बरकरार है।
इंडिया गठबंधन के घोषणापत्र का मसौदा तैयार
इंडिया गठबंधन ने अपना घोषणापत्र मसौदा तैयार कर लिया है। कई विश्लेषक मानते हैं कि इसे जारी करते हुए सीएम चेहरा घोषित किया जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी तेजस्वी को घोषित करने की सलाह दी, महाराष्ट्र चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए।प्राशांत किशोर ने जन सुराज के बैनर तले तंज कसा कि गठबंधन में सीएम चेहरा केवल लालू परिवार से ही होगा। महागठबंधन के लिए समय कम है। क्या यह विवाद सुलझेगा या एनडीए को फायदा मिलेगा? यह सियासी घड़ी की टिक-टिक पर निर्भर करता है।



