नई दिल्ली: बांग्लादेश की सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के शासनकाल के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों में कथित संलिप्तता के आरोप में कार्रवाई करते हुए 15 सैन्य अधिकारियों को हिरासत (Military Officers Arrested) में लिया है। इनमें से कुछ अधिकारी वर्तमान में सेवा में हैं, जबकि बाकी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह कार्रवाई देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा 30 आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के तीन दिन बाद की गई है।
हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद जांच तेज़
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के चलते शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। तब से देश में उनके शासनकाल के दौरान हुई कथित ज्यादतियों की जांच तेज हो गई है। हसीना की पार्टी, अवामी लीग, को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है और उसके कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं।
सेना ने दी कानूनी प्रक्रिया में सहयोग की बात
मेजर जनरल मोहम्मद हकीमुज्जमां ने बयान जारी करते हुए कहा कि “मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में 15 पूर्व और वर्तमान सैन्य अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। सेना न्यायिक प्रक्रिया का पूरा समर्थन करेगी।” सेना के इस कदम को देश में न्याय और जवाबदेही की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
आईसीटी का आदेश और गिरफ्तारी की समयसीमा
आठ अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना समेत 30 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह वारंट उन मामलों से जुड़ा है जिनमें जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। न्यायाधिकरण ने आदेश दिया कि सभी आरोपितों को 22 अक्टूबर तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए। इस आदेश पर न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हस्ताक्षर किए।
किन बड़े नामों पर गिर सकती है गाज
शेख हसीना के अलावा कई बड़े नाम भी इस जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान, पूर्व रक्षा सलाहकार और सेवानिवृत्त मेजर जनरल तारिक अहमद सिद्दीकी, तथा पूर्व पुलिस प्रमुख बेनजीर अहमद शामिल हैं। इनके अलावा 27 अन्य आरोपित सैन्य अधिकारी हैं, जिनमें कुछ वर्तमान में भी सेवा में हैं।
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राजनीतिक अस्थिरता के बीच बढ़ा तनाव
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण है। विपक्षी दलों ने सरकार पर “राजनीतिक प्रतिशोध” का आरोप लगाया है, जबकि सेना और न्यायाधिकरण का कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यह मामला देश की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है।



