पटना: भारतीय राजनीति में जब भी किसी नेता ने यात्रा निकाली। इसका लाभ उसे मिला है। इसका कारण है ज़मीन पर जाकर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधा संवाद करना। उनके दर्द को समझना, उस हिसाब से अपनी रणनीति बनाना। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं का दिल से जुड़ाव हो जाना। शायद इसी सोच के साथ बिहार चुनाव से पूर्व विभिन्न पार्टियों विशेषक विपक्षी दलों ने पूरे बिहार को मथ डाला। सत्ता पक्ष से चिराग ने भी रथ निकालकर बिहार में चिराग जलाने को कोशिश की। उधर भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने मोर्चा संभाला और हिंदू स्वाभिमान यात्रा के नाम से सीमांचल के पांच मुस्लिम बहुल जिलों का दौरा किया।
माहौल बनाने की कोशिश
अब किसकी यात्रा कितनी असरदार रही, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा, लेकिन इससे हर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने में कामयाब हुई है। गांधी ने बिहार में चुनाव से पूर्व अगस्त-सितंबर माह में वोटर अधिकार यात्रा निकालकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। इसके साथ ही वोट चोरी के मुद्दे पर एक अभियान चलाया गया और उसका व्यापक प्रचार भी किया गया। इस यात्रा के दौरान अंत तक आते-आते राहुल गांधी के मंच से किसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को अपशब्द बोल दिया और कांग्रेस बैकफुट पर आ गयी।
सवाल यात्रा भारी पड़ेगी या प्रधानमंत्री की मां को कहे अपशब्द
अब यह यात्रा चुनाव में काम आएगी या फिर चुनाव तक प्रधानमंत्री की मां को बोले गये अपशब्द लोगों के जेहन में घुमता रहेगा। यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल सकेगा। इतना जरूर है कि उसी यात्रा के भरोसे कांग्रेस अब अपनी मनमाफिक सीट लेने का दबाव बना रही है। इस बीच प्रशांत किशोर भी अपनी नई नवेली पार्टी के साथ लगातार यात्राओं में व्यस्त रहे हैं।
तेजस्वी भी नहीं रहे पीछे
इन सबके बीच जब तेजस्वी ने देखा कि उनका साथ लेकर राहुल गांधी ने पूरा अपना क्रेडिट ले लिया तो वे पुन: अकेले बिहार अधिकार यात्रा पर निकल पड़े। यह यात्रा दस जिलों (जहानाबाद, नालंदा, पटना, बेंगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर और वैशाली) से होकर गुजरी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने इस बहाने अपने समर्थकों जोश भरने का पूरा प्रयास किया। उसमें बहुत हद तक सफल भी कहा जा सकता है।
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पाटलीपुत्र विवि के डाक्टर विकास ने कहा
इस संबंध में पाटलीपुत्र विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. विकास कुमार का कहना है कि परिणाम में कौन तब्दील कर पाएगा यह तो बताना मुश्किल है, लेकिन अभी तक सर्वाधिक असरदार यात्रा जन सुराज के प्रशांत किशोर की दिख रही है। वे जहां भी जा रहे हैं, वहां लोगों के दिल तक अपनी बातों को पहुंचाने में सफल हो रहे हैं, जहां तक लोगों के जुड़ाव का सवाल है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस बार लोग ज्यादा प्रभावित हैं।
वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, किसकी यात्रा रही निविर्वाद
वहीं पटना के वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शेखर का कहना है कि यात्राओं में विवाद या निर्विवाद का मुद्दा भी निर्भर करता है। यदि विपक्ष को कोई मुद्दा दिये बिना यात्रा हो जाती है तो वह सफल मानी जाएगी।यात्रा के बीच में ही कोई विवाद खड़ा हो गया तो लोगों की मानसिकता भी बदल जाती है। अब ये यात्राएं किसके लिए शुभ होंगी। यह चुनाव परिणाम बताएगा। हालांकि अभी सभी दल अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने में सफल रहे हैं।
विधानसभा में तेजस्वी ने किया शानदार प्रदर्शन, मगर लोकसभा में दोहरा नहीं पाये
यदि पिछले इतिहास को देखें तो पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने वोट और सीटों के मामले में शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि लोकसभा चुनाव में वह इसे दोहरा नहीं सके। बिहार में भाजपा की ओर से सम्राट चौधरी और कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी यहां भी अन्य राज्यों की तरह नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ रही है। अब बात यह है कि शख्सियत के तौर पर एक तरफ तेजस्वी यादव और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मतदाता कैसे देख रहे हैं?
भाजपा के लिए प्रधानमंत्री का चेहरा ही प्रमुख
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि भाजपा और नीतीश कुमार अब तक आरजेडी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने भाजपा के ही बिहार के तीन बड़े नेता दिलीप जायसवाल, सम्राट चौधरी और मंगल पांडेय पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर इस मुद्दे को गौंड़ कर दिया। वह बताते हैं कि बिहार में भाजपा का अब कोई बड़ा नेता नहीं रह गया है। इस कारण पार्टी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निर्भर रहना होगा। पार्टी के लोग भी कह रहे हैं कि वह पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे।



