नई दिल्ली: गाजा में जारी संघर्ष (Gaza Ceasefire Talk) को समाप्त करने के लिए मिस्र के तटीय शहर में चल रही शांति वार्ता अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार को इस वार्ता के तीसरे दिन अमेरिका के शीर्ष मिडिल ईस्ट सलाहकार (Trump Middle East Visit), कतर के प्रधानमंत्री और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए। इससे साफ है कि अब चर्चा अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है, जहां सबसे कठिन मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।
हमास ने रखी गारंटी की मांग
हमास ने (Israel-Hamas Peace Deal) वार्ता में हिस्सा लेते हुए स्पष्ट किया है कि उसे मध्यस्थ देशों — खासकर अमेरिका और कतर — से यह ठोस आश्वासन चाहिए कि यदि वह अपने कब्जे में रखे सभी बंधकों को रिहा कर देता है, तो इजरायल दोबारा सैन्य अभियान शुरू नहीं करेगा। हमास के प्रवक्ता ने कहा कि बिना इस भरोसे के कोई स्थायी समझौता संभव नहीं होगा।
दो साल से जारी युद्ध की त्रासदी
करीब दो साल से चल रहे इस संघर्ष में अब तक हजारों फलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। गाजा पट्टी (Gaza Conflict) का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका है, और लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, क्षेत्र में मानवीय संकट अपने चरम पर है और भोजन, पानी व दवाइयों की भारी कमी है।
तीन प्रमुख विवादित मुद्दे
हालांकि वार्ता आगे बढ़ रही है, लेकिन कई अहम बिंदुओं पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। इनमें सबसे प्रमुख हैं—
- 1. हमास का निरस्तीकरण: यानी संगठन द्वारा हथियार छोड़ने की प्रक्रिया।
- 2. इजरायली सेना की वापसी: सेना कब और किन क्षेत्रों से हटेगी, इस पर विवाद है।
- 3. शासन व्यवस्था का भविष्य: गाजा पर हमास के बाद किस संस्था को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाएगी, यह मुद्दा भी जटिल बना हुआ है।
ट्रंप के दौरे से बढ़ी उम्मीदें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को संकेत दिया कि वे जल्द ही मिडिल ईस्ट की यात्रा पर जा सकते हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “शायद मैं इस हफ्ते के आखिर में वहां जाऊं। बातचीत उम्मीद से बेहतर चल रही है।” ट्रंप प्रशासन ने पहले ही गाजा में स्थायी शांति के लिए 20 सूत्रीय योजना पेश की है, जिसे अब व्यावहारिक रूप देने की कोशिश की जा रही है।
शांति की दिशा में निर्णायक पल
विश्लेषकों का मानना है कि यह वार्ता इस पूरे संकट का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर हमास और इजरायल दोनों पक्ष कुछ रियायतें देने पर राजी हो जाते हैं, तो यह मिडिल ईस्ट में वर्षों से चली आ रही हिंसा और अस्थिरता को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा।



