नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने तीन महीनों के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। दिलचस्प बात यह रही कि इस बैठक से पहले ट्रंप ने दोनों मेहमानों को करीब एक घंटे तक इंतजार कराया। इस मुलाकात ने दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है।
शहबाज ने ट्रंप को बताया ‘शांति दूत’
मुलाकात के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने ट्रंप की जमकर तारीफ की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को “शांति दूत” करार दिया और याद दिलाया कि भारत के साथ संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था।
शरीफ ने अपने भाषण में दावा किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान मजबूत स्थिति में था, लेकिन ट्रंप के हस्तक्षेप के कारण संघर्ष विराम पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप ने समय पर और निर्णायक कदम न उठाए होते तो दक्षिण एशिया एक खतरनाक युद्ध का गवाह बन सकता था।
कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा
जैसा कि हर साल होता है, शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरी जनता के साथ खड़ा है और संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में जनमत संग्रह होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इसका उल्लंघन पाकिस्तान के लिए युद्ध की कार्रवाई के समान होगा।
भारत ने उठाए सवाल
भारत ने शरीफ (India-Pakistan Relations) के बयानों पर सवाल खड़े किए। भारतीय पक्ष ने कहा कि शरीफ का भाषण बिना सबूतों वाला और खोखले दावों से भरा हुआ था। पाकिस्तान ने आतंकवाद पर चुप्पी साध ली और यह भी नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था।
भारत ने इस मुलाकात पर औपचारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि भारत उन सभी बैठकों पर नजर रखता है, जिनका असर उसके हितों पर पड़ सकता है।
मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो जारी नहीं
गौर करने वाली बात यह रही कि ट्रंप-शरीफ-मुनीर की मुलाकात के बाद न तो कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और न ही व्हाइट हाउस ने तस्वीरें या वीडियो जारी किए। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेशी नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें साझा की जाती हैं, लेकिन इस बार प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
जानकारी केवल पाकिस्तान सरकार की ओर से दी गई। बताया गया कि शहबाज शरीफ छह साल बाद व्हाइट हाउस आने वाले पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बने। इससे पहले 2019 में तत्कालीन पीएम इमरान खान ने ट्रंप से मुलाकात की थी।
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भारत की सतर्क निगाह
भले ही भारत ने इस मुलाकात पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों पर भारत गहरी नजर रखेगा। पाकिस्तान द्वारा लगातार भारत विरोधी बयानबाजी और आतंकवाद को लेकर दोहरे रवैये को देखते हुए भारत की कूटनीति और भी सजग रहने की संभावना है।
यह पूरी घटना दक्षिण एशिया की राजनीति में अमेरिका की भूमिका और पाकिस्तान की रणनीतियों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आई है।



