मिज़ोरम में 51 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे परियोजना कई कारणों से चर्चा का केंद्र बनी हुई है। लेकिन इस बार ये परियोजना SAIL के कारण चर्चा में है। दरअसल भारत की महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने ही इस परियोजना के लिए लगभग 15,000 मीट्रिक टन इस्पात उत्पादों की सप्लाई की थी। जिस कारण सरकार ने इसे धन्यवाद सन्देश दिया है। इस बुनियादी परियोजना का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री ने 13 सितंबर, 2025 को किया था।
क्या है बैराबी-सैरांग परियोजना
यह परियोजना उत्तर पूर्व राज्यों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि अब मिजोरम की राजधानी आइज़ोल को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा। अब आइज़ोल, गुवाहाटी, अगरतला और ईटानगर के बाद पूर्वोत्तर की चौथी राजधानी होगी जो रेल नेटवर्क से जुड़ गई है।
अगर इस परियोजना की बात करें तो इसकी लंबाई 51.38 किलोमीटर है, जिसके साथ 45 सुरंगें, 55 बड़े पुल, 87 छोटे पुल और 10 रोड ओवर व अंडर पास बनाए गए हैं। परियोजना का लगभग 54% हिस्सा सुरंगों और पुलों से होकर गुजरता है। ब्रिज नंबर 144, जो सैरांग के पास स्थित है, 114 मीटर ऊँचा है और भारत का सबसे ऊँचा पियर रेलवे पुल बन गया है। यह कुतुब मीनार से भी ऊँचा है।
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बैराबी-सैरांग परियोजना से कई मोर्चों पर होगा फायदा
जानकारों की माने तो इस परियोजना से भारत को कई फायदे होंगे जैसे इस दुर्गम क्षेत्र में परिवहन लागत में कमी आएगी और पर्यटन एवं व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। अगर रणनीतिक महत्व की बात करें तो यह परियोजना भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती प्रदान करेगी।




