नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा संचालित लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के विकास को प्राथमिकता दी है। यह जानकारी ओडिशा से लोकसभा सांसद सुकांत कुमार पाणिग्रही की तरफ से संसद के मानसून सत्र के दौरान पूछे गए अतारांकित सवाल के जवाब में सामने आई। केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की।
पाणिग्रही के सवाल के जवाब में सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2025 के केंद्रीय बजट में ‘विकसित भारत’ के लिए नाभिकीय ऊर्जा मिशन की शुरुआत की, जिसमें एसएमआर के अनुसंधान और विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) वर्तमान में तीन प्रमुख प्रकार के लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर काम कर रहा है। इसमें भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200): यह रिएक्टर एल्यूमीनियम, इस्पात और धातु जैसे ऊर्जा गहन उद्योगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उपयोग सेवा समाप्त हो रहे तापीय विद्युत संयंत्रों और स्वोत्पाद (कैप्टिव) विद्युत संयंत्रों के पुनर्प्रयोजन के लिए किया जाएगा। साथ ही, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर-55): यह रिएक्टर दूरदराज और ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति के लिए बनाया गया है, ताकि ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन मुक्त किया जा सके। यही नहीं, उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (5 मेगावाट): यह रिएक्टर परिवहन और प्रक्रिया उद्योगों को कार्बन मुक्त करने के लिए हाइड्रोजन उत्पादन पर केंद्रित है।
ओडिशा में एसएमआर की स्थापना
सांसद सुकांत पाणिग्रही ने विशेष रूप से ओडिशा के भंजनगर में एसएमआर स्थापित करने की व्यवहार्यता के बारे में पूछा था, क्योंकि यह स्थान इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल), छत्रपुर से लगभग 150 किमी की दूरी पर है। जवाब में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग रिएक्टरों की प्रमुख इकाइयों को विशिष्ट स्थानों पर स्थापित करने की योजना बना रहा है। हालांकि, भंजनगर में एसएमआर स्थापना के लिए कोई विशेष व्यवहार्यता अध्ययन का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय, सरकार ने कहा कि एसएमआर की बाद की इकाइयां, नियामक अनुमोदन के अधीन, स्वोत्पाद विद्युत संयंत्रों के लिए अंतिम उपयोगकर्ता की तरफ से प्रस्तावित उद्योग स्थलों पर या सेवा समाप्त हो रहे तापीय विद्युत संयंत्रों के लिए उपयुक्त पूर्व-विकसित (ब्राउन फील्ड) स्थलों पर स्थापित की जाएंगी।
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भविष्य की योजनाएं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य में ऐसे प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है, ताकि देश के पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर ओडिशा जैसे राज्यों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके। यह कदम भारत के कार्बन न्यूट्रल लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यह पहल न केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने में योगदान देगी, बल्कि ओडिशा जैसे औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता को भी बढ़ाएगी।



