नई दिल्ली: नेपाल (Nepal) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रविवार को पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की (Sushila Karki) ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पद संभाला और पदभार ग्रहण करते ही कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। कार्की ने कहा कि जेन-जी प्रदर्शन (Gen-Z Protests) के दौरान मारे गए लोगों को ‘बलिदानी’ घोषित किया जाएगा और उनके परिजनों को 10 लाख नेपाली (Compensation 10 lakh NPR) रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
प्रदर्शन और हिंसा पर कड़ा रुख
पदभार संभालने के बाद कार्की ने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जिन लोगों ने हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेन-जी समूह के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का इन आपराधिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था, बल्कि यह सुनियोजित हिंसा थी जिसके जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।
पुलिस चौकियों की मरम्मत और नई कार्यप्रणाली
प्रधानमंत्री कार्की (PM Sushila Karki) ने मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल को निर्देश दिया कि देशभर में आंदोलन के दौरान नष्ट हुई पुलिस चौकियों की जल्द से जल्द मरम्मत की जाए। आंदोलनकारियों ने सिंह दरबार सचिवालय स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में भी आगजनी की थी, इसलिए अब गृह मंत्रालय के नवनिर्मित भवन का उपयोग प्रधानमंत्री कार्यालय के रूप में किया जाएगा।
Gen-Z प्रदर्शन: बढ़ता जनहानि और कैदी संकट
आंदोलनों की तीव्रता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि जेन-जी प्रदर्शनों में अब तक 72 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 59 प्रदर्शनकारी, 3 पुलिसकर्मी और 10 कैदी शामिल हैं। कई जेलों पर भीड़ के हमले के बाद 10,320 कैदी फरार हो गए थे, जिनमें से 3,723 को नेपाल पुलिस ने दोबारा पकड़ लिया है। कुछ कैदी स्वेच्छा से लौट आए, जबकि भारतीय सुरक्षा बलों ने भी सीमा पर भागने की कोशिश कर रहे कई कैदियों को गिरफ्तार किया।
सत्ता परिवर्तन और कार्की की नियुक्ति
73 वर्षीय सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जेन-जी समूह की सिफारिश पर कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया। गौरतलब है कि इसी समूह ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के जरिए केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की सत्ता को उखाड़ फेंका था। कार्की ने सिंह दरबार सचिवालय के नवनिर्मित गृह मंत्रालय भवन में सुबह 11 बजे पदभार ग्रहण किया।
चीन ने दी बधाई
कार्की की नियुक्ति पर चीन ने भी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि चीन और नेपाल की मित्रता पुरानी है और बीजिंग, नेपाल के लोगों के फैसले का सम्मान करता है। चीन ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
निष्कर्ष
नेपाल इस समय राजनीतिक और सामाजिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ देश की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश से प्रधानमंत्री बनने की यात्रा है, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक नया नेतृत्व भी है। उनकी सख्त नितियां और तत्काल फैसले इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में नेपाल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



