नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र में कहा कि इंडिया-यूरोपीय संघ व्यापक एवं संतुलित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए गंभीरता और प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं। इससे दोनों पक्षों के व्यवसायों एवं उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त होगा। इस प्रकार का समझौता एकतरफा नहीं हो सकता है क्योंकि प्रत्येक वार्ता को निष्पक्ष एवं संतुलन बनाने के लिए कुछ हद तक लेन-देन शामिल किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि एक आदर्श समझौते को प्रगति का दुश्मन नहीं बनने दिया जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वार्ता बहुत सकारात्म दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया के माध्यम से उजागर हो रही संभावनाओं के प्रति आशा व्यक्त किया जो विशाल है और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं गहन आर्थिक भागेदारी का अवसर खोलेगी। गोयल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र जैसे साहसिक एवं दूरदर्शी उद्योग, जो पहले की एफटीए वार्ताओं से लगातार मजबूत हुआ है, को भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी के अंतर्गत तैयार किए जा रहे प्रावधान आकर्षक एवं संभावनाओं से भरपूर लगेंगे।
ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र अहम कड़ी
उन्होंने आशा व्यक्त किया कि एफटीए वार्ताओं को हमेशा मजबूती देने वाले ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र को भारत और यूरोपीय संघ के बीच हो रही व्यवस्थाएं आकर्षक और रोमांचक लगेंगी। उनमें व्यवसायों के विकास, सहयोग, नवाचार, अनुसंधान और विकास में शामिल होने की भरपूर संभावनाएं होंगी। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र ने भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता का समर्थन करके एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत होकर लगातार लचीलापन एवं दूरदृष्टि दिखाई है।
गोयल ने कहा कि एफटीए भारतीय निर्माताओं के लिए अपने यूरोपीय समकक्षों और विश्व के अन्य क्षेत्रों की कंपनियों के साथ साझेदारी करने का नया मार्ग खोलेगा जिससे संयुक्त उद्यमों, प्रौद्योगिकी साझेदारी और सहयोगात्मक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता का सावाल है तो भारत महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है चाहे वह डिज़ाइन, विकास या अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र हों और देश में कुशल प्रतिभा भंडार के साथ यह भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव कंपनियों के लिए एक आकर्षक केंद्र बना देगा। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां लागत में कमी लाने, उत्पादकता बढ़ाने, भारतीय युवाओं के लिए रोज़गार उत्पन्न करने और देश को उच्च-गुणवत्ता वाले ऑटोमोटिव घटक निर्माण का एक अग्रणी केंद्र बनाने में मदद करेंगी।
इस सत्र को यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा, अंतर-संस्थागत संबंध एवं पारदर्शिता आयुक्त, महामहिम मारोस शेफोविच ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ अभूतपूर्व गति से एक अभूतपूर्व मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस वर्तमान चर्चा को दोनों भागीदारों के बीच अब तक की सबसे गहन एवं रचनात्मक चर्चाओं में से एक कहा। उन्होंने कहा कि यद्यपि मुक्त व्यापार समझौते पर पहले भी बातचीत के प्रयास किए गए लेकिन इससे पहले यह प्रक्रिया इतनी गंभीर, आपसी विश्वास और साझा महत्वाकांक्षा के स्तर तक कभी नहीं पहुंची थी। आयुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा पूर्व में व्यक्त की गई प्रतिबद्धता के अनुरूप इस वर्ष के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं।
आर्थिक रूप से सार्थक पैकेज बनाने की कोशिश
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों पक्ष एक ऐसा आर्थिक रूप से सार्थक पैकेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो उत्पादकों, निर्यातकों एवं उपभोक्ताओं के हितों को समान रूप से संतुलित करे। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य एक ऐसे वास्तविक लाभप्रद समझौते पर पहुंचना है जो न केवल वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाए बल्कि दोनों पक्षों के बीच निवेश, नवाचार, सतत प्रथाओं और गहन सहयोग को भी बढ़ावा दे।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन रहा भारत
उन्होंने कहा कि भारत तेज गति से वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन रहा है और भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी यूरोपीय संघ के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, ठीक उसी तरह जैसे यूरोपीय प्रौद्योगिकी एवं पैमाने से भारत के विकास को लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि भारत को यूरोप की तकनीक एवं नवाचार से लाभ होगा जबकि यूरोपीय संघ को भारत के विकास, पैमाने एवं लचीलेपन से लाभ होगा। उन्होंने भारत में वाहनों तक लोगों की पहुंच को वर्तमान में प्रति हज़ार 34 कारों से बढ़ाकर उल्लेखनीय रूप से उच्च स्तर तक ले जाने की भारत की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया, जिससे ऑटो घटक उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार के अवसर उत्पन्न होंगे।



