नई दिल्ली: चीन में खेती का नाम सुनते ही धान, गेहूं या सब्जियों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वहां मगरमच्छ की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है? यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं, बल्कि अरबों डॉलर की कमाई वाला उद्योग है। मगरमच्छों को उनके मांस और खाल के लिए पाला जाता है, जो खाद्य और फैशन उद्योग में बेशकीमती माने जाते हैं। यह व्यवसाय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनोखी प्रक्रिया के लिए भी चर्चा में रहता है।
मगरमच्छ पालन की प्रक्रिया
मगरमच्छ की खेती की शुरुआत उनके अंडों से होती है। विशेष फार्मों में रेत के घोंसले बनाए जाते हैं, जहां मादा मगरमच्छ अंडे देती हैं। इन अंडों को सावधानी से इकट्ठा कर हैचरी में ले जाया जाता है। वहां तापमान को 29 से 34 डिग्री सेल्सियस और नमी को नियंत्रित रखा जाता है। करीब 65 से 90 दिनों में अंडे फूटते हैं और छोटे मगरमच्छ बाहर आते हैं। इन बच्चों को विशेष टैंकों में रखा जाता है, जहां साफ पानी, पौष्टिक आहार और पर्याप्त जगह दी जाती है। जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं, इन्हें या तो प्रजनन के लिए रखा जाता है या मांस और खाल के लिए प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा जाता है।
मांस और खाल की मांग
चीन में मगरमच्छ का मांस उच्च श्रेणी के रेस्तरां में लोकप्रिय है। इसे कम वसा, कोमल और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। मांस को पूंछ, पीठ और पैरों जैसे हिस्सों में बांटकर बेचा जाता है। दूसरी ओर, मगरमच्छ की खाल फैशन जगत में सोने सरीखी है। इससे महंगे बैग, जूते और बेल्ट बनाए जाते हैं, जो लग्जरी ब्रांड्स की पहचान हैं। इस उद्योग से हर साल लगभग 9 अरब डॉलर की कमाई होती है।
विवाद और चुनौतियां
हालांकि यह कारोबार आर्थिक रूप से फायदेमंद है, लेकिन इसे लेकर विवाद भी कम नहीं हैं। पशु संरक्षण संगठन इसे क्रूर और अनैतिक मानते हैं। उनका कहना है कि खाल के लिए मगरमच्छों को मारना प्रजातियों के संरक्षण के लिए खतरा है। इसके बावजूद, मांग की वजह से यह उद्योग फल-फूल रहा है।



