The Conjuring: लास्ट राइट्स रिव्यू: डर कम, ड्रामा ज्यादा 

The Conjuring: लास्ट राइट्स’ फ्रेंचाइजी का अंतिम अध्याय है, जो एड और लोरेन केस को दर्शाता है, लेकिन कमजोर हॉरर और अधिक ड्रामे के कारण यह निराश करता है।

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नई दिल्ली: ‘The Conjuring: लास्ट राइट्स’ मशहूर पैरानॉर्मल जांचकर्ता एड (पैट्रिक विल्सन) और लोरेन वॉरेन (वेरा फार्मिगा) के अंतिम केस की कहानी है, जो 1961 में शुरू होती है। फिल्म की शुरुआत में लोरेन, गर्भवती होने के दौरान, एक शापित आईने की जांच करती है और डरावने दृश्य देखती है। इसके बाद उनकी बेटी जूडी (मिया टॉमलिंसन) का जन्म होता है, जो चमत्कारिक रूप से जीवित बचती है। साल 1986 में, रिटायरमेंट की योजना बना रहे वॉरेन दंपत्ति को पेंसिल्वेनिया के स्मर्ल्स परिवार की मदद के लिए बुलाया जाता है। बता दें, यह परिवार एक शापित आईने के कारण भयावह घटनाओं का शिकार है। कहानी में जूडी और उसके मंगेतर टोनी (बेन हार्डी) भी शामिल हो जाते हैं, जिससे यह केस व्यक्तिगत हो जाता है। क्या वॉरेन इस शाप से अपनी और स्मर्ल्स परिवार की रक्षा कर पाएंगे? यह फिल्म का मुख्य आकर्षण है। 

अभिनय की ताकत

वेरा फार्मिगा और पैट्रिक विल्सन ने एक बार फिर अपनी शानदार केमिस्ट्री से दर्शकों का दिल जीता। दोनों ने अपने किरदारों को गहराई दी, खासकर भावनात्मक दृश्यों में। मिया टॉमलिंसन ने जूडी के रूप में ठीक-ठाक प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ जगहों पर उनकी एक्टिंग कमजोर लगी। बेन हार्डी और इलियट कोवान ने भी अपने रोल को बखूबी निभाया, खासकर क्लाइमैक्स में। 

निर्देशन और कमियां

माइकल चावेस का निर्देशन इस बार निराशाजनक रहा। फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्मों की तरह डरावने दृश्यों का अभाव है। पहले हाफ में कहानी वॉरेन के निजी जीवन पर ज्यादा केंद्रित है, जो उबाऊ लगता है। शापित आईने से जुड़े हॉरर सीन्स घिसे-पिटे और कम प्रभावशाली हैं। स्मर्ल्स परिवार की कहानी को और गहराई दी जा सकती थी। क्लाइमैक्स में कुछ रोमांच है, जैसे हीथर का केक कटिंग सीन और फादर गार्डन की मौत, लेकिन यह भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। 

क्या है खास?

फिल्म में वॉरेन दंपत्ति की भावनात्मक यात्रा और उनकी बेटी जूडी के साथ रिश्ता दिल को छूता है। कुछ दृश्य, जैसे अंधेरे में छाया और खून की उल्टी वाला सीन, डर पैदा करते हैं। पुरानी फिल्मों के रेफरेंस प्रशंसकों को पुरानी यादें ताजा करेंगे। 

क्या बेहतर हो सकता था?

फिल्म का पहला हाफ छोटा और हॉरर पर केंद्रित हो सकता था। डरावने दृश्यों को और रचनात्मक बनाया जा सकता था। स्मर्ल्स परिवार की कहानी को और विस्तार देना चाहिए था ताकि दर्शक उनसे जुड़ पाते। 

देखें या नहीं?

अगर आप ‘द कॉन्ज्यूरिंग’ फ्रेंचाइजी के प्रशंसक हैं और वॉरेन दंपत्ति के आखिरी केस को जानना चाहते हैं, तो फिल्म देख सकते हैं। लेकिन डरावने अनुभव की उम्मीद न रखें। 

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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