नई दिल्ली: स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) ने आगामी CGL परीक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। SSC चेयरमैन एस. गोपालकृष्णन ने बताया कि अब परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित होगी और अभियार्थियो को 100 किलोमीटर के भीतर ही एग्जाम सेंटर मिलेंगे। कमीशन द्वारा छात्रों की शिकायतों के बाद यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
फैसले के पीछे का कारण
24 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच SSC परीक्षाओं में तकनीकी गड़बड़ियों, आधार वेरिफिकेशन में देरी, और दूर-दराज़ के एग्जाम सेंटर की शिकायतों के चलते छात्रों ने राजधानी में खूब विरोध प्रदर्शन किया था। इन समस्याओं को देखते हुए आयोग ने पूरी प्रक्रिया की पुनः समीक्षा की और परीक्षा प्रणाली में कई बड़े और अहम बदलाव किए हैं।
नई नॉर्मलाइजेशन पॉलिसी
SSC चेयरमैन एस. गोपालकृष्णन ने बताया कि अब शिफ्ट-वाइज नॉर्मलाइजेशन लागू होगा। यानी, अगर किसी शिफ्ट का पेपर कठिन होगा, तो छात्रो का मूल्यांकन उसी शिफ्ट के आधार पर किया जाएगा।
चार एजेंसियों को बांटी गई जिम्मेदारी
SSC चेयरमैन के अनुसार, पहले एक ही एजेंसी परीक्षा और प्रश्नपत्र दोनों संभालती थी, लेकिन अब जिम्मेदारी चार अलग-अलग एजेंसियों में विभाजित की जाएगी जिसमे:
- एक एजेंसी परीक्षा केंद्रों की जिम्मेदारी संभालेगी।
- दूसरी एजेंसी सुरक्षा के इन्तेजाम देखेगी।
- तीसरी आवेदन प्रबंधन की।
- वही चौथी एजेंसी प्रश्नपत्र तैयार करेगी।
आधार वेरिफिकेशन और सुरक्षा
अब आवेदन से लेकर जॉइनिंग तक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा। SSC के शुरुआती एग्जाम में OTP वेरिफिकेशन में तकनीकी दिक्कतें थीं, लेकिन अब सिस्टम स्थिर हो चुका है। इससे पेपर लीक और नकल की संभावनाएं भी पूरी तरह खत्म होंगी।
एग्जाम सेंटर की दूरी होगी कम
पहले कई अभियार्थियो को 500 किमी तक दूर एग्जाम सेंटर मिले थे। अब, नए सिस्टम के तहत 80% छात्रो को उनकी पसंद के मुताबिक केंद्र दिए जा रहे हैं, और जल्द ही यह संख्या 90% से ज्यादा हो जाएगी। अधिकतम दूरी 100 किमी तक ही राखी जाएगी।
पेन-पेपर मोड की वापसी नहीं
SSC चेयरमैन ने साफ किया कि परीक्षाएं अब कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) पर ही होंगी। उनका कहना है कि पेन-पेपर मोड में पेपर लीक और एग्जाम में देरी की संभावना अधिक होती है, जबकि CBT से पारदर्शिता और तेजी से रिजल्ट मिलते हैं।
निष्कर्ष
SSC द्वारा किए गए ये बदलाव उम्मीदवारों की सुविधा, पारदर्शिता और निष्पक्षता को ध्यान में रखकर किए गए हैं। एक ही शिफ्ट में परीक्षा, 100 किमी के भीतर सेंटर, आधार आधारित वेरिफिकेशन और नई नॉर्मलाइजेशन पॉलिसी से छात्रों को राहत मिलेगी। इन कदमों से न केवल तकनीकी गड़बड़ियों पर नियंत्रण होगा, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और सुचारू भी बनेगी।



