नई दिल्ली: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज और कल 58वीं GST काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इस बैठक में 175 से अधिक वस्तुओं पर GST दरों में कटौती और मौजूदा चार स्लैब की जगह दो नए स्लैब लागू करने पर बड़ा फैसला होने की है। इस फैसले के से सरकार का मकसद GST स्ट्रक्चर को अधिक आसान बनाना, महंगाई पर काबू पाना और साथ ही उपभोग को बढ़ाना है।
बैठक का एजेंडा
- केंद्र और राज्य के वित्त मंत्रियों की मौजूदगी में यह बैठक GST 2.0 सुधारों पर केंद्रित होगी।
- मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो स्लैब (5% और 18%) में बदलने का प्रस्ताव रखे जा सकते है।
- इसके अलावा, 40% का नया “लक्ज़री/सिन” टैक्स भी लाया जा सकता है, जिसमें महंगी कारें और लग्ज़री गुड्स शामिल होंगे जिनकी कीमत ₹50 लाख या उससे ज्यादा होगी।
- ₹40,000–₹50,000 करोड़ का मुआवजा पैकेज राज्यों के लिए प्रस्तावित है ताकि राजस्व की कमी पूरी की जा सके।
कौन सी वस्तुओं की दरो पर हो सकती है कटौती
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार लगभग 175 वस्तुओं पर कम से कम 10% तक GST घटाने की तैयारी में है। जिसमे मुख्य बदलाव इस निम्न प्रकार से हो सकते हैं:
- रोजाना उपयोग की वस्तुएं – टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, टैल्कम पाउडर → 18% से 5%
- डेयरी प्रोडक्ट्स – मक्खन, पनीर, दही, पिकल्स, रेडी-टू-ईट स्नैक्स → 12%/18% से 5%
- कपड़ा और खाद्य पदार्थ ज्यादातर आइटम्स को 5% स्लैब में लाया जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक गुड्स जैसे टीवी, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, सीमेंट – 28% से 18%।
- हाइब्रिड और छोटे पेट्रोल कार – 28% से 18%।
- ₹20–40 लाख की इलेक्ट्रिक कार -5% से बढ़कर 18% हो सकती हैं।
- लक्ज़री EVs पर 40% टैक्स का प्रस्ताव।
किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा
- FMCG कंपनियां – हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज, नेस्ले जैसी कंपनियों की सेल्स बढ़ सकती हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री – टीवी, एसी, वाशिंग मशीन के दाम घटने की संभावना।
- ऑटोमोबाइल सेक्टर – छोटी पेट्रोल व हाइब्रिड कारों की कीमतें कम हो सकती हैं, लेकिन लग्ज़री EV मार्केट पर असर पड़ेगा।
- सीमेंट और रियल एस्टेट – दरें घटने से निर्माण लागत कम हो सकती है।
निष्कर्ष
GST काउंसिल की 58वीं बैठक भारत की टैक्स प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अगर 175 वस्तुओं पर टैक्स घटता है और स्लैब स्ट्रक्चर सरल होता है, तो महंगाई कम होगी, उपभोग बढ़ेगा और घरेलू उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा। हालांकि, राज्यों के राजस्व और लग्ज़री EV मार्केट पर इसका असर देखने लायक होगा।



