अमेरिका में चुनावी नियमों में होगा बदलाव, Trump करेंगे वोटर ID जरूरी

अमेरिका की चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि सभी चुनावों में मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य होगा। उन्होंने इसके लिए कार्यकारी आदेश लाने की बात कही है, हालांकि इसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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नई दिल्ली: अमेरिका में चुनावी व्यवस्था (US Elections) को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ऐलान किया है कि देश में होने वाले हर चुनाव के लिए मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) अनिवार्य होगा। इसके लिए वे एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा “हर अमेरिकी मतदाता के पास वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए। कोई अपवाद नहीं होगा! मैं इस संबंध में कार्यकारी आदेश जारी करने जा रहा हूं।

मेल-इन वोटिंग का विरोध

Donald Trump ने इस पोस्ट के जरिए एक बार फिर स्पष्ट किया कि वे मेल-इन वोटिंग (डाक द्वारा मतदान) का कड़ा विरोध करते हैं। उनका कहना है कि केवल वे लोग ही डाक द्वारा मतदान कर सकेंगे जो गंभीर रूप से बीमार हैं या सैन्य सेवा के कारण दूरस्थ स्थानों पर तैनात हैं। इसके अलावा, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर भी सवाल उठाए और इनके इस्तेमाल का विरोध जताया।

चुनावी कानूनों पर असर और कानूनी चुनौतियां

यह घोषणा अमेरिकी चुनावी कानूनों को प्रभावित करने की ट्रंप की कोशिश को दर्शाती है। लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति को सीधे तौर पर चुनावों के नियम बनाने या निगरानी करने का अधिकार नहीं है। यह जिम्मेदारी राज्यों की होती है। ऐसे में अगर ट्रंप अपने कार्यकारी आदेश को लागू करते हैं तो इसके खिलाफ कानूनी चुनौतियां उठना तय है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा चुनावी प्रक्रिया में सीधे दखल संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ माना जा सकता है। इसी वजह से इस आदेश को अदालत में चुनौती मिलना लगभग तय है।

2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप और उनकी टीम 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections 2026) से पहले माहौल अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। लंबे समय से ट्रंप मेल-इन वोटिंग (Mail-in Voting) पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि इससे चुनावी धांधली की आशंका बढ़ जाती है। याद दिला दें कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन से हारने के बाद भी ट्रंप ने कहा था कि मेल-इन वोटिंग के कारण धांधली हुई। हालांकि उनके इन दावों को कई अदालतों ने सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया था।

पहले भी हो चुका है प्रयास

मार्च 2025 में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर यह अनिवार्य किया था कि संघीय चुनावों में वोट डालने के लिए नागरिकों को अमेरिकी नागरिकता का सरकारी प्रमाण दिखाना होगा। लेकिन इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई और जून 2025 में एक संघीय न्यायाधीश ने इसके कई प्रावधानों पर रोक लगा दी थी। ट्रंप का यह कदम अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ने वाला है। जहां एक ओर रिपब्लिकन समर्थक इसे चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं डेमोक्रेटिक खेमे और कई विशेषज्ञ इसे मताधिकार सीमित करने का प्रयास मान रहे हैं। अब देखना होगा कि यह प्रस्ताव कानूनी अड़चनों से निकलकर अमल में आ पाता है या फिर अदालत एक बार फिर ट्रंप के आदेश पर रोक लगा देती है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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