नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव इस बार नए अंदाज़ में नजर आ रहे हैं। हाई कोर्ट की सख्ती और प्रशासन की सख़्त गाइडलाइंस के बाद इस बार चुनाव प्रचार का तरीका पूरी तरह से बदल गया है। कैंपस में अब सैकड़ो पोस्टरों और गंदगी की जगह पर्यावरण सुरक्षा और रचनात्मक प्रचार देखने को मिल रहा है। सूखे पत्तों के बैज, कपड़े के बैनर, हैंडमेड पोस्टर और कुल्हड़ वाली चाय इस चुनाव की पहचान बन गए हैं। विश्वविद्यालय चुनाव 18 सितंबर 2025 को होने वाले हैं और कैंपस पूरी तरह साफ-सुथरा दिखाई दे रहा है।
HC की सख्ती से आया बड़ा बदलाव
पिछले साल DU कैंपस में चुनावी प्रचार के नाम पर गंदगी का अंबार लग गया था। पोस्टरों, पर्चों और बैनरों के ढेर ने कैंपस का हाल पूरी तरह बिगाड़ दिया था। यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद कोर्ट ने कॉलेज प्रशाशन को फटकार लगते हुए कैंपस को साफ-सुथरा बनाने के निर्देश दिए। इसी वजह से इस बार के चुनाव प्रचार में न ही गंदगी हैं और न ही दीवारों पर लगे पोस्टर।
पत्तों के बैज और हैंडमेड पोस्टर से प्रचार
इस बार छात्र संगठनों ने नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के तरीकों को अपनाया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शहीद भगत सिंह कॉलेज में सूखे पत्तों पर ABVP लिखकर उन्हें छात्रों में बैज की तरह बांटना शुरू किया है। वहीं NSUI कपड़े और जुट के पोस्टरों का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा हाथ से बने पोस्टर, कपड़े के बैनर और रंग-बिरंगे स्लोगन प्रचार को अलग और एक नई पहचान दे रहे हैं।
कुल्हड़ वाली चाय और डोर-टू-डोर कैंपेन
NSUI ने इस बार प्रचार का अनोखा तरीका अपनाया है। संगठन ने मिट्टी के कुल्हड़ पर NSUI लिखकर छात्रों को चाय पिलाने की योजना बनाई है। इस दौरान छात्रों से चुनावी चर्चा की जाएगी और पार्टी की नीतियों पर भी बात होगी। वहीं, ABVP के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा के मुताबिक इस बार प्रचार का सबसे बड़ा हथियार डोर-टू-डोर कैंपेन है। कार्यकर्ता छात्रों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद कर रहे हैं और अपनी नीतियां बता रहे हैं।यह तरीका छात्रों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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निष्कर्ष
इस बार के DUSU चुनाव प्रचार में छात्र संगठनों की रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी जिम्मेदारी,दोनों ही देखने को मिल रही हैं। है। कैंपस साफ-सुथरा है, प्रचार का तरीका आकर्षक है और छात्र संगठनों के बीच सीधा संवाद भी बढ़ा है। 18 सितंबर को होने वाले इन चुनाव में अब देखना यह होगा की कौन सा छात्र संगठन बाजी मरता हैं।



