पटना: बिहार में बिजली आपूर्ति को और अधिक विश्वसनीय बनाने और अक्षय ऊर्जा (renewable energy) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू हो गया है। बिहार राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के 15 ग्रिड सब-स्टेशनों में 125 मेगावाट/500 मेगावाट आवर बैट्री इनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए छह बड़ी कंपनियों के साथ समझौते किए गए हैं।
परियोजना का उद्देश्य और लाभ
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली की आपूर्ति को और अधिक विश्वसनीय बनाना है, खासकर पीक आवर्स के दौरान जब बिजली की मांग बहुत ज्यादा होती है। इन स्टोरेज सिस्टम्स में बिजली को स्टोर किया जाएगा, जिससे जरूरत के समय, खासकर शाम के समय, चार घंटे तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति की जा सकेगी।
बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस पहल को राज्य की ऊर्जा संरचना के लिए एक नई दिशा बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी, बल्कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को भी कुशलतापूर्वक उपयोग करने में मदद करेगी।
कार्यान्वयन और आवंटित कंपनियां
परियोजना को 15 ग्रिड सब-स्टेशनों में लागू किया जा रहा है, और इसके लिए छह एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रोस्टारिम इन्फो सिस्टम्स लिमिटेड: फतुहा, जहानाबाद, रफीगंज, सीवान, बांका, और किशनगंज, बार्बिक प्रोजेक्ट लिमिटेड: मुजफ्फरपुर, अष्टावन, और जमुई, सूर्यम इंटरनेशनल: मोतिहारी, कुंदन ग्रीन इनर्जी: बेतिया, हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स: भागलपुर, उदाकिशनगंज, और सीतामढ़ी, सात्विक: शिवहर शामिल हैं।
यह परियोजना केंद्र सरकार की व्यावहारिकता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) योजना के तहत स्वीकृत हुई है। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड ने इसके लिए खुली निविदाएं आमंत्रित की थीं, जिसके बाद इन छह कंपनियों का चयन किया गया।



