ओडिशा में SC और ST के कल्याण, विकास व सशक्तीकरण पर होगा मंथन

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में भुवनेश्वर में अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के विकास, कल्याण व सशक्तीकरण पर दो दिनों तक मंथन होने जा रहा है।

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नई दिल्ली: ओडिशा के भुवनेश्वर में 29 अगस्त को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विकास, कल्याण और सशक्तीकरण पर मंथन होगा। संसद और राज्य विधानमंडलों की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापतियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। एक स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा।

इस सम्मेलन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सभापति डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते भी इसमें हिस्सा लेंगे। संसद और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापति और सदस्य; ओडिशा सरकार के मंत्री और ओडिशा विधान सभा के सदस्य भी मौजूद होंगे।

दो दिनों में पहुंचे 

इस दो दिवसीय सम्मेलन (29-30 अगस्त 2025) में संसद और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधानमंडलों की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापतियों और सदस्यों सहित 120 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का विषय-अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण, विकास और सशक्तीकरण में संसदीय और विधायी समितियों की भूमिका।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा

इस सम्मेलन में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के सशक्तीकरण के लिए संवैधानिक सुरक्षोपायों को सुदृढ़ करने, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही 2047 तक एक समावेशी विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कल्याणकारी नीतियों के कार्यान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित करने में संसदीय और राज्य विधानमंडल समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला जाएगा।

1976 में  हुआ था पहला सम्मेलन 

अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापतियों का पहला सम्मेलन 1976 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसके बाद, 1979, 1983, 1987 और 2001 में सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें  अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और संवैधानिक सुरक्षोपायों के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की गई । इस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली से बाहर  पहली बार किया जा रहा है।

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