नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने चीन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका को रेयर अर्थ मैग्नेट्स की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की, तो चीनी आयात पर 200% तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ मुलाकात के दौरान ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, चीन को हमें मैग्नेट्स देना ही होगा, वरना हमें 200% टैरिफ या ऐसा ही कुछ लगाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जिनके इस्तेमाल से चीन की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है, लेकिन वह इनका उपयोग नहीं करना चाहते। ट्रम्प ने हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की और बीजिंग की संभावित यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, शायद इस साल या अगले साल की शुरुआत में मैं चीन जाऊंगा।
अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध: टैरिफ का खेल
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव लंबे समय से चला आ रहा है। इस साल अप्रैल में ट्रम्प ने चीनी आयात पर 145% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामानों पर 125% टैरिफ की बात कही। मई में जिनेवा में हुई एक ट्रेड डील के बाद दोनों देशों ने टैरिफ कम किए। वर्तमान में अमेरिका ने चीनी सामानों पर 30% और चीन ने अमेरिकी सामानों पर 10% टैरिफ लागू किया है। ट्रम्प ने 12 अगस्त 2025 को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए टैरिफ डेडलाइन को 90 दिनों के लिए बढ़ाकर 9 नवंबर तक कर दिया था, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स: क्यों है विवाद का केंद्र?
चीन ने अप्रैल में रेयर अर्थ तत्वों और मैग्नेट्स की आपूर्ति पर सख्त नियंत्रण लागू किए, जिसे अमेरिकी टैरिफ की जवाबी कार्रवाई माना गया। इनमें सात प्रमुख रेयर अर्थ तत्व शामिल थे, जो ऑटोमोबाइल, ड्रोन, मिसाइल और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों के लिए जरूरी हैं। चीन वैश्विक स्तर पर 90% रेयर अर्थ मैग्नेट्स का उत्पादन करता है, जिससे उसकी बाजार में मजबूत पकड़ है। इन सामग्रियों का उपयोग स्मार्टफोन, सौर ऊर्जा, सैन्य उपकरण और तेल रिफाइनरियों तक में होता है। चीन के इस कदम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिसने अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को मुश्किल में डाल दिया।
टैरिफ का असर: चीन की अर्थव्यवस्था पर खतरा
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध का असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ बढ़कर 200% तक पहुंचा, तो चीन की जीडीपी में 1% तक की गिरावट आ सकती है। चीन हर साल अमेरिका को 500 अरब डॉलर (करीब 43 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का सामान निर्यात करता है। एप्पल जैसी कंपनियां, जो चीन में बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं, को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, ट्रम्प के सलाहकार पीटर नवारो ने कहा है कि अत्यधिक टैरिफ से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है, इसलिए इसकी संभावना कम है।
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ट्रम्प की रणनीति: व्यापार संतुलन या कुछ और?
ट्रम्प का कहना है कि वह चीन के साथ बेहतर रिश्ते चाहते हैं, लेकिन उनका फोकस व्यापार संतुलन के साथ-साथ चीन की सरकारी सब्सिडी नीतियों पर भी है। अमेरिका का आरोप है कि चीन अपनी कंपनियों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा होती है। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि चीन बौद्धिक संपदा कानूनों में सुधार करे और विदेशी कंपनियों को टेक्नोलॉजी सेक्टर में ज्यादा मौके दे। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही अन्य व्यापारिक साझेदारों के साथ टैरिफ दरें तय करेंगे, जिससे वैश्विक व्यापार में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



