नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने छात्रसंघ (DUSU) चुनावों के लिए एक नया नियम लागू करते हुए उम्मीदवारों से ₹1 लाख का बॉन्ड जमा कराने का फैसला किया था। इस कदम का उद्देश्य पिछले साल की तरह चुनाव प्रचार के दौरान विश्वविद्यालय और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना था। हालांकि, इस निर्णय का कई छात्र संगठनों और छात्रों ने जोरदार विरोध किया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि जमा करना आर्थिक रूप से सभी उम्मीदवारों के लिए संभव नहीं है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालेगा। लगातार विरोध और आपत्तियों के बाद, DU प्रशासन ने फिलहाल इस फैसले पर अंतिम निर्णय टाल दिया है और छात्रों से 16 अगस्त तक अपने लिखित सुझाव और आपत्तियां देने को कहा है। अब विश्वविद्यालय इन पर विचार कर आगे का कदम तय करेगा।
बॉन्ड की शुरुआत और कारण
विश्वविद्यालय ने यह नियम पिछले साल चुनावों के दौरान विश्वविद्यालय और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचने की घटनाओं को रोकने के लिए लागू किया था। 8 अगस्त को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि “हर प्रत्याशी को DUSU के किसी भी पद के लिए नामांकन दाखिल करते समय ₹1,00,000 का बॉन्ड जमा करना होगा, यदि उनके या उनके समर्थकों द्वारा किसी प्रकार का नुकसान या उल्लंघन होता है तो विश्वविद्यालय द्वारा जमा किए गए बॉन्ड की रकम इस्तेमाल की जाएगी।
छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन की बैठक
मुख्य चुनाव अधिकारी राज किशोर शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने छात्रों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। छात्रों ने बॉन्ड जमा करने से इंकार किया और 16 अगस्त तक अपनी लिखित शिकायतें प्रशासन को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। शर्मा ने कहा, “हम इसके बाद फिर से विचार करेंगे और अंतिम निर्णय लेंगे।”
पिछले साल के घटनाक्रम
पिछले साल, 27 सितंबर 2024 को DUSU चुनाव हुए थे, लेकिन चुनावों के दौरान संपत्ति की क्षति के कारण वोटों की गिनती और परिणाम घोषित होने में लगभग दो महीने की देरी हुई थी। जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी नुकसान को हटाने का आदेश दिया था।
पिछले साल के घटनाक्रम
इस साल DUSU चुनाव 18 सितंबर को होंगे और वोटों की गिनती 19 सितंबर को। नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 10 सितंबर, दोपहर 3 बजे तक है। इसी दौरान ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए ₹1,00,000 के बॉन्ड के विरोध में तत्काल वापसी की मांग की। ABVP ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने बॉन्ड को वापस नहीं लिया, तो विश्वविद्यालय स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
अंतिम फैसला अभी लंबित
राज किशोर शर्मा ने कहा कि पिछले साल की घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय ने अदालत को सुधारों के सुझाव प्रस्तुत किए थे, जिनमें यह बॉन्ड शामिल था। लेकिन छात्रों के विरोध के मद्देनजर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
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निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय ने DUSU चुनावों में ₹1 लाख बॉन्ड की आवश्यकता पर अंतिम फैसला स्थगित कर दिया है। छात्रों और छात्र संगठनों के विरोध के कारण प्रशासन अब 16 अगस्त तक लिखित प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लेगा। यह कदम पिछले साल संपत्ति की क्षति जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से रखा गया था, लेकिन छात्रों के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के मद्देनजर विश्वविद्यालय अब विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में है।



