SC में RJD: SIR में जल्दबाजी दुर्भावनापूर्ण

RJD सांसद मनोज झा ने SC में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हो रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को अलग करने की मांग की है। 

Share This Article:

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही वोटर लिस्ट रिवीजन की सुनवाई के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को अलग करने की मांग की है।

मुख्य मांगें

  • SIR को चुनाव से अलग किया जाए: मनोज झा ने कहा कि वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से अलग कर देना चाहिए।
  • आधार को शामिल किया जाए: उन्होंने यह भी मांग की कि आधार को दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जाए।
  • हटाए गए मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक हो: सांसद ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि वोटर लिस्ट से हटाए गए मतदाताओं की जानकारी कारण सहित सार्वजनिक की जाए।
  • दावा और आपत्तियों की समय-सीमा बढ़ाई जाए: उन्होंने एसआईआर पर आयोग द्वारा मांगी जा रही दावा और आपत्तियों की समय-सीमा को भी आगे बढ़ाने की मांग की।

खराब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉनसून का हवाला

आरजेडी सांसद की ओर से वकील फौजिया शकील ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बिहार के खराब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हवाला देते हुए कहा कि 1 करोड़ से अधिक प्रवासियों के लिए कम समय में अपने दस्तावेजों को अपलोड करना तार्किक नहीं है। इसके अलावा, बिहार के कई जिले मॉनसून में बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे एसआईआर कराना अव्यावहारिक है। शकील ने कहा कि सितंबर और अक्टूबर में स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे समय में एसआईआर कराना चुनाव आयोग की गलत योजना को दर्शाता है।

दावा और आपत्तियों के निपटारे में जल्दबाजी

मनोज झा ने दलील दी कि चुनाव आयोग ने दावा और आपत्तियों के निपटारे के लिए केवल 24 दिनों का समय दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 1 लाख लोग भी आवेदन करते हैं, तो 20 दिनों में उन पर फैसला कैसे हो सकता है? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि जल्दबाजी से दुर्भावना की संभावना बढ़ जाती है।

हटाए गए नामों को सार्वजनिक करने की मांग

वकील शकील ने कोर्ट से कहा कि चुनाव आयोग का यह दावा सही नहीं है कि वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की सूची और कारण बताना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को मृत्यु के मामलों में भी मृत्यु प्रमाण पत्र देखना होता है, लेकिन वे खुद ही नाम हटा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हटाए गए नामों को सार्वजनिक करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि बिहार के लोगों और राजनीतिक दलों को भी यह नहीं बताया गया कि किन मतदाताओं को हटाया गया है। राजनीतिक दलों को लिस्ट फोटो फॉर्मेट में दी गई है, जिससे इसकी जांच करना मुश्किल है।

मृत घोषित किए गए लोग अदालत में पेश हुए

शकील ने चुनाव आयोग के इस दावे को भी गलत ठहराया कि सूची पूरी तरह से प्रमाणित है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों चुनाव आयोग द्वारा मृत घोषित किए गए लोग अदालत में पेश हुए थे, जो इस प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.