भागलपुर: बिहार में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत राज्य के 36 जिलों के 50,000 किसानों को एकदिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (RPCAU), समस्तीपुर का सहयोग लिया जाएगा।
प्रशिक्षण की रूपरेखा और उद्देश्य
प्रशिक्षण का लक्ष्य: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से अवगत कराना और उनकी क्षमता बढ़ाना है। इसके लिए 36 जिलों में 400 क्लस्टर बनाए गए हैं।
विश्वविद्यालयों की भूमिका: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (RPCAU) को कृषि निदेशालय द्वारा इस प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मास्टर ट्रेनर और मॉडल फॉर्म: हर प्रशिक्षण संस्थान में एक मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया गया है, जो प्राकृतिक खेती का एक मॉडल फॉर्म विकसित करेगा। इससे किसानों को व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी।
सुविधाएं: प्रशिक्षु किसानों को प्रशिक्षण के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
जिलावार किसानों की संख्या
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों से किसानों को चिह्नित किया गया है, जिनकी संख्या इस प्रकार है।
- 1,000 किसान: अररिया और मुंगेर
- 1,125 किसान: औरंगाबाद, बांका, बक्सर, जमुई, लखीसराय और रोहतास
- 1,875 किसान: बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, गया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, सारण, समस्तीपुर और पश्चिमी चंपारण
- 1,250 किसान: भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, गोपालगंज, कैमूर, कटिहार, मधेपुरा, नवादा, सुपौल और वैशाली
- 1,500 किसान: सीवान, पटना और पूर्णिया
- 2,000 किसान: सीतामढ़ी
- 625 किसान: शेखपुरा
- 1,375 किसान: जहानाबाद
- 750 किसान: खगड़िया और किशनगंज
अधिकारियों का बयान
बीएयू के कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह ने कहा, “कृषि निदेशालय के पत्र के आधार पर किसानों को ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है। इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।”
कृषि निदेशालय ने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इन विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण को पूरा कराने का निर्देश दिया है। यह पहल बिहार में सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकारी पहल
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): यह खबर भारत सरकार के राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) से जुड़ी है। इस मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना खेती को प्रोत्साहित करना है।
सतत कृषि का लक्ष्य: सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है, पानी की खपत कम होती है, और किसानों की लागत घटती है। यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती है।
बिहार में कृषि की स्थिति
किसानों की निर्भरता: बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। यहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका: बिहार में दो प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय हैं- बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (RPCAU), समस्तीपुर…. ये विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान और किसानों को नई तकनीकें सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस खबर में इन्हीं विश्वविद्यालयों का सहयोग लिया जा रहा है, जिससे इस पहल की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकता
ज्ञान और जागरूकता की कमी: कई किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीकों की सही जानकारी नहीं होती। उन्हें यह भी नहीं पता होता कि रासायनिक उर्वरकों के बिना अच्छी उपज कैसे प्राप्त की जाए।
प्रशिक्षण का उद्देश्य: यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी कमी को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को जमीनी स्तर पर प्राकृतिक खेती के तरीके सिखाना और उनमें विश्वास पैदा करना है।
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति, बिहार में कृषि की स्थिति, और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे एक बड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आधारित है।



