इस बार लोकतंत्र की ‘रक्षा’ का भी बंधन

रक्षा बंधन के त्योहार में बहनें, भाइयों से गिफ्ट में पिता के विधानसभा क्षेत्र का नंबर मांग रही हैं।वही किसी के पिता बुजुर्ग हैं तो उनके लिए मुश्किल हो सकती हैं।

Share This Article:

पूर्णिया: रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार न केवल भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक बन रहा है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का संदेश भी दे रहा है। वहीं बिहार में इस बार राखी के धागों के साथ-साथ नागरिकों में मतदान और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का जुनून भी देखने को मिल रहा है। आइए, जानते हैं कैसे इस रक्षाबंधन पर लोग अपने वोट की ताकत को लोकतंत्र की ढाल बनाने की शपथ ले रहे हैं। रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम और अटूट बंधन का त्योहार है। नौ अगस्त को होने वाले रक्षाबंधन के त्योहार में बहना अपने भाइयों से गिफ्ट में पिता के विधानसभा क्षेत्र का नंबर मांग रही हैं।
मतदाता सूची के प्रारूप के प्रकाशन के बाद अब 2003 के बाद ब्याही गयी महिलाओं से दस्तावेज मांगा जा रहा है। पति के दस्तावेज के आधार पर कई चुनाव में वोट डालने वाली इन महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि मायके छूटे लंबे समय बीत जाने के बाद अब पिता के दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं।
अब एकाएक इस नये शासनिक फरमान के बाद कोसी और सीमांचल की लाखों महिला मतदाताओं के सामने निर्वाचन सूची में बने रहने का संकट आ गया है। इसलिए कई महिला जहां रक्षाबंधन में मायके जाकर पिता के विधानसभा क्षेत्र के नंबर के साथ बूथ और सीरियल नंबर जुटाने की कोशिश में हैं। वहीं जिन बहनों के घर पर भाई आने वाले हैं उनसे इस बार उपहार में इन दस्तावेजों की डिमांड की जा रही है।
2003 में प्रकाशित मतदाता सूची में जिन महिलाओं के नाम दर्ज हैं उन्हें कोई परेशानी नहीं है। मगर इसके बाद जिन महिलाओं का नाम वोटर सूची में जोड़ा गया है, उन्हें ही यह दस्तावेज उपलबध् कराना है। 2003 के बाद 22 सालों में लाखों की संख्या में ससुराल आकर महिलाएं मतदाता बनीं हैं। अब उन्हें उनके पिता के विधानसभा नंबर के साथ अन्य जानकारी बीएलओ को उपलब्ध कराना है।

मंडलीय आयु ने कहा- शासन का काम, बीएलओ ने कहा, कट जाएगा नाम

विशेष गहन पुनरीण 2025 के निमित्त मतदाता सूची के प्राप का काशन हो चुका है। अब शासन के इस फरमान ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि, मंडलीय आयु राजेश कुमार कहते हैं कि यह शासन का काम है। हालांकि, बीएलओ कर रहे हैं कि उन्हें शासनिक फरमान है। इन दस्तावेजों के नहीं देने पर वोटर लिस्ट से नाम कट जाएगा।

किसी के पिता बुजुर्ग, किसी के लाचार, भाई परदेस में करता नौकरी

रोजगार महिलाओं के सामने सवाल दस्तावेज उपल कराने भर का नहीं है। अगर किसी के पिता बुजुर्ग हैं या फिर बीमार व लाचार हैं तो उनके लिए यह दस्तावेज जुटाकर भेजना मुश्किल है। अधिकांश घरों में बुजुर्ग माता-पिता हैं। भाई रोजगार के लिए परदेस में है। ऐसे में महिला मतदाता के लिए इन नंबर को जुटाना आसान काम नहीं है।
यह पहल न केवल रक्षाबंधन को एक नया आयाम दे रही है, बल्कि जिले के नागरिकों को यह याद दिला रही है कि लोकतंत्र की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है। जैसे राखी भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करती है, वैसे ही वोट की ताकत देश को सशक्त बनाती है। इस बार का रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन गया है, जो लोकतंत्र के प्रति नई जागरूकता का प्रतीक है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.