नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके मद्देनजर रेलवे सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए भारतीय रेलवे ने सौर ऊर्जा निगम, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय व टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड के साथ साझेदारी कर रहा है। इस कड़ी में नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में रेलवे टीएचडीसी के साथ 400 मेगावाट हाइड्रो पावर के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया है।
यह समझौता 31 जुलाई 2025 को आशीष मेहरोत्रा, मुख्य विद्युत इंजीनियर व उत्तर रेलवे और आरके वर्मा, अपर महाप्रबंधक (वाणिज्य), टीएचडीसीआईएल के बीच ऋषिकेश में औपचारिक रूप से संपन्न हुआ। यह रणनीतिक पहल भारतीय रेलवे की सततता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है और भारत के जलवायु संरक्षण के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जो पंचामृत के तहत प्रधानमंत्री द्वारा COP26 ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के अंतर्गत घोषित किए गए थे।
इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे पहले ही विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना डेवलप कर्ताओं के माध्यम से 621 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से समझौते कर चुका है। टीएचडीसीआईएल के साथ नवीनतम इस दिशा को और अधिक सशक्त बनाता है, जिससे भारतीय रेलवे को हरित ऊर्जा की एक स्थिर और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित होगी और इसके डीकार्बोनाइजेशन रणनीति को समर्थन मिलेगा। यह 400 मेगावाट हाइड्रो पावर अरुणाचल प्रदेश में स्थित कलाई हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (1200 मेगावाट) से प्राप्त की जाएगी।
कम कार्बन उत्सर्जन माल ढुलाई बढ़ाना
रेलवे ने 2030 तक माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी 35 फीसदी से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है, जो सडक़ परिवहन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है। इसके लिए भारतीय रेलवे विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान दे रहा है।



