जम्मू-कश्मीर को फिर मिलेगा राज्य का दर्जा!

J&K से धारा 370 खत्म हुए छह साल हो रहे हैं। सवाल बड़ा यह है कि क्या जम्मू-कश्मीर को दुबारा पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। सरकार ने पहले इसका वादा भी किया है।

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नई दिल्ली: पांच अगस्त और मोदी सरकार, क्या कोई नया अध्याय जुड़ने वाला है? जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर के शिलान्यास जैसे ऐतिहासिक फैसलों के बाद, 5 अगस्त की तारीख एक बार फिर सुर्खियों में है। अब ऐसी अटकलें हैं कि क्या जम्मू-कश्मीर को 6 साल बाद फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने वाला है?

क्या जम्मू-कश्मीर को फिर से मिलेगा पूर्ण राज्य का दर्जा
हाल के घटनाक्रमों के कारण इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या जम्मू-कश्मीर को 5 अगस्त को एक बार फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिल सकता है। ये अटकलें कई वजहों से लगाई जा रही हैं। 

राष्ट्रपति से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की, जिसने इन अटकलों को और हवा दी है।

NDA संसदीय दल की बैठक
NDA के संसदीय दल की बैठक मंगलवार सुबह होने वाली है, जिसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

5 अगस्त की तारीख
यह तारीख पहले भी कई बड़े फैसलों का गवाह रही है, जैसे कि राम मंदिर का शिलान्यास और अनुच्छेद 370 को हटाना। ये दोनों फैसले भी 5 अगस्त को ही लिए गए थे।

सरकार का वादा
सरकार ने पहले भी कई बार यह कहा है कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। इस वादे के कारण भी लोग यह मान रहे हैं कि अब वह “सही समय” आ गया है।

 फारूक अब्दुल्ला का बयान
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने भी इस मांग को दोहराया है, जिससे यह मुद्दा और भी चर्चा में आ गया है।

सरकार ने पहले क्या कहा था
2019 में जब जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, तब से ही वहां के लोगों और नेताओं ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की है। इसके जवाब में, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हमेशा यही कहा है कि जम्मू-कश्मीर को सही समय पर पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। उन्होंने कभी इस बात से इनकार नहीं किया कि राज्य का दर्जा बहाल नहीं होगा।

जम्मू कश्मीर का प्रोफाइल

पूर्ण राज्य का दर्जा कैसे मिलेगा
किसी भी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाना होता है। इस प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पास कराना होता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलती है। 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के तहत इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। अब इसमें संशोधन करने के लिए एक नया संशोधन विधेयक संसद में पेश किया जा सकता है।

फारूक अब्दुल्ला की मांग
अनुच्छेद 370 हटाए जाने की छठी बरसी से पहले फारूक अब्दुल्ला ने सरकार से मांग की है कि वह बताए कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा कब दिया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि राज्यसभा की खाली पड़ी चार सीटों पर भी चुनाव कराए जाएं, ताकि लोगों की आवाज को सदन में उठाया जा सके। क्या इन घटनाक्रमों के पीछे कोई बड़ा फैसला छुपा है, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

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