नई दिल्ली: How Russia Sells Cheapest Crude Oil: रूस कैसे बेचता है सबसे सस्ता तेल और अन्य देश क्यों नहीं कर पाते मुकाबला? स्वतंत्रता दिवस 2025 के मौके पर भारत में तेल की कीमतें चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर रूस से मिलने वाले सस्ते तेल के कारण। भारत अपनी तेल जरूरतों का 35-40% रूस से पूरा करता है, क्योंकि रूस भारी छूट पर कच्चा तेल उपलब्ध कराता है। लेकिन सवाल यह है कि रूस इतना सस्ता तेल कैसे बेच पाता है, और अन्य देश इसका मुकाबला क्यों नहीं कर पाते? जानिए सभी के जवाब इस लेख में।
रूस का सस्ता तेल: कारण क्या है?
रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक और सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। यह प्रतिदिन लगभग 95 लाख बैरल कच्चा तेल पैदा करता है, जो वैश्विक मांग का 10% है। रूस में तेल उत्पादन की लागत कुछ क्षेत्रों में बेहद कम है, जिसके चलते वह कम कीमत पर भी मुनाफा कमा लेता है। इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाए, जिसके कारण रूस को भारत जैसे गैर-प्रतिबंधित देशों को सस्ते दामों पर तेल बेचना पड़ा। रूस हर दिन 45 लाख बैरल कच्चा तेल और 23 लाख बैरल रिफाइंड तेल निर्यात करता है।
अन्य देशों की चुनौतियां
पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस को नए बाजार तलाशने पड़े, और उसने भारत और अन्य एशियाई देशों को सस्ता तेल देकर अपनी जगह बनाई। सऊदी अरब जैसे अन्य तेल उत्पादक देशों में उत्पादन लागत अपेक्षाकृत अधिक है, और वे वैश्विक कीमतों को स्थिर रखने के लिए OPEC जैसे संगठनों के नियमों का पालन करते हैं। रूस इन नियमों से बंधा नहीं है, जिससे वह कम कीमतों पर तेल बेच सकता है। साथ ही, रूस की अर्थव्यवस्था तेल निर्यात पर बहुत हद तक निर्भर है, इसलिए वह बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए छूट देता है।
भारत के लिए महत्व
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता भारत है, साथ ही अपनी 85% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। भारत के लिए रूस से सस्ता तेल आर्थिक रूप से फायदेमंद है। अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो वैश्विक तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे भारत सहित कई देशों को नुकसान होगा।



