भोपाल: मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के बाद भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एटीएस ने उन्हे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत जैसे बड़े नेताओं का नाम लेने के लिए मजबूर किया था।
नाम न लेने पर प्रताड़ित करने का आरोप
साध्वी प्रज्ञा ने रविवार को मीडिया को बताया कि जब उन्होंने एटीएस अधिकारियों की बात नहीं मानी और किसी का भी नाम नहीं लिया तो उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी कहा है कि उन्होंने मुझे बड़े नेताओं के नाम लेने के लिए मजबूर किया। उन नामों में विशेष रूप से मोहन भागवत, राम माधव, प्रधानमंत्री मोदी, योगी आदित्यनाथ और इंद्रेश कुमार शामिल थे।
परमबीर सिंह ने हर सीमा पार की
प्रताड़नाओं को लेकर, उन्होंने परमबीर सिंह सहित सभी एटीएस अधिकारियो पर गंभीर आरोप लगाए। साध्वी प्रज्ञा ने कहा, परमबीर सिंह बहुत निकृष्ट और अदम व्यक्ति है क्योंकि उसने हर सीमा पार की है, हर कानून को तोड़ा है और कानून से बाहर जाकर मुझे प्रताड़नाएं दी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हे 13 दिनों तक गैर-कानूनी हिरासत में और 11 दिनो तक पुलिस हिरासत में रखा गया था, जिससे वे कुल 24 दिनों तक एटीएस की प्रताड़नाएं झेलती रही।
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फैसला भगवा आतंकवाद कहने वालों के मुंह पर तमाचा
एनआईए कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले पर साध्वी प्रज्ञा ने इसे “भगवा आतंकवाद” कहने वालों के लिए करारा जवाब बताया। उन्होंने कहा, यह उन लोगों के मुंह पर तमाचा है, जिन्होंने इसे ‘भगवा आतंकवाद’ कहा। समाज और देश ने उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सत्य की जीत हुई है, क्योंकि धर्म और सत्य उनके पक्ष में था।
गौरतलब है कि एनआईए कोर्ट ने हाल ही में 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
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