मधुबनी/बेनीपट्टी: बिहार में बेनीपट्टी और मधुबनी के दो प्रमुख स्कूलों की दयनीय स्थिति ने शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल दी है। बेनीपट्टी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, मुसहरी में 125 बच्चों का भविष्य जर्जर इमारत में कैद है, जबकि जिले के एकमात्र आदर्श विद्यालय, वाटसन प्लस टू उच्च विद्यालय में शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक कार्यों के कारण पढ़ाई लगभग ठप है। यह विरोधाभास शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बेनीपट्टी का मुसहरी स्कूल की जर्जर इमारत
बेनीपट्टी के बसैठ चानपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, मुसहरी की स्थिति अत्यंत दयनीय है। 125 बच्चों के भविष्य को संवारने का प्रयास एक जर्जर भवन में किया जा रहा है, जिसमें न तो शौचालय है और न ही चहारदीवारी। स्कूल के दो कमरों में से एक को उसकी दयनीय स्थिति के कारण हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। दूसरा कमरा, जो थोड़ा कम जर्जर है, उसी में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को एक साथ बैठाया जाता है।
विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें से एक को अभी चार्ज लेना बाकी है। हेडमास्टर अनिल कुमार चौधरी ने बताया कि पिछले तीन वर्षो से भवन की जर्जरता के संबंध में लगातार संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही नया भवन नहीं बनाया गया तो किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। यह भी एक विडंबना है कि स्कूल के पास केवल 15 धुर जमीन है, जिससे नए निर्माण में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
यह भी पढ़े: DU UG एडमिशन: DU ने तीसरे राउंड का शेड्यूल किया जारी
वाटसन प्लस टू उच्च विद्यालय
जिला मुख्यालय में स्थित वाटसन प्लस टू उच्च विद्यालय, जिसे कभी आदर्श विद्यालय के रूप में चिह्नित किया गया था, आज अपनी बदहाली के लिए सुर्खियो मे है। पिछले दो सालों से यहां विज्ञान विषय के लिए कोई शिक्षक नहीं है, और अन्य विषयों में भी शिक्षकों की भारी कमी है। छात्रों को ट्यूशन और कोचिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि साल के लगभग 50% दिन प्रशासनिक कार्यों जैसे चुनाव, पुलिस भर्ती परीक्षा और विभागीय बैठकों में ही निकल जाते हैं। पिछले एक महीने से तो लगातार इन्हीं आयोजनों के कारण पढ़ाई पूरी तरह ठप है। यहां तक कि प्लस टू के लिए बने नए भवन के छह कमरों में से तीन कमरे भी अन्य कार्यों के लिए अधिग्रहित रहते हैं।
यह स्थिति तब है जब जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय इसी परिसर में स्थित है। छात्रों को साल भर मे मुश्किल से 100 दिन ही क्लास मिल पाती है, जबकि सरकार ने 75% उपस्थिति अनिवार्य कर रखी है। प्रभारी एचएम सतीश कुमार ने शिक्षकों की कमी और आधारभूत संरचना की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। स्थानीय लोगों और छात्रों में इस उपेक्षा को लेकर भारी नाराजगी है।
गौरतलब है कि ये दोनों मामले यह दर्शाते हैं कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य किस तरह प्रशासनिक लापरवाही और आधारभूत संरचना की कमी के कारण अंधेरे में है। सवाल यह उठता है कि जब ये स्कूल खुद ही इतनी बुरी स्थिति में हैं, तो शिक्षा विभाग इनसे किस तरह के परिणाम की उम्मीद कर रहा है।
यह भी पढ़े: बेटियों की शिक्षा पर ग्रहण, साधनों की कमी



