आयुष मंत्रालय से चिरंजीवी हो रहीं मेडिकल सुविधाएं

केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने अपने एक दशक के सफर में भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रसार की दिशा में कई मजबूत पहलें की हैं। आइए, विस्तार से इसे जानते हैं...

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नई दिल्ली: 2014 में शुरू हुआ आयुष मंत्रालय (एमओए) करीब 11 साल में अहम मुकाम पर पहुंच चुका है। वह प्रिवेंटिव, प्रमोटिव और करेटिव हेल्थ सर्विस में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दो आयोगों से एजुकेशन और प्रेक्टिशनल प्रेक्टिस को रेगुलेट किया जा रहा है। आयुर्वेद में सिद्ध, यूनानी और सोवा-रिग्पा के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग और होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग है। आइए जानते हैं कि मेडिकल क्षेत्र को आयुष मंत्रालय कैसे मजबूत बना रहा है… 

शिक्षण संस्थानों की स्थापना
आयुष मंत्रालय ने 12 राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों की स्थापना की है। इनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डायग्नोस्टिक सर्विस और आउटरीच को एकीकृत करके चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पाठ्यक्रम हैं। ये एनएबीएच व एनएबीएल (अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड/ परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशालाओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड) मान्यता प्राप्त अस्पतालों के माध्यम से ओपीडी व आईपीडी (बाह्य रोगी विभाग व अंतर्रोगी विभाग) सेवाएं प्रदान करते हैं और देश भर में स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और समुदाय-आधारित पहल का आयोजन करते हैं।

ओपीडी और आईपीडी सेवाएं
सीसीआरएएस, सीसीआरयूएम और सीसीआरएच अपने व्यापक नेटवर्क के माध्यम से ओपीडी और आईपीडी सेवाएं मुहैया कराते हैं। सीसीआरएएस के अंतर्गत 30 संस्थान, सीसीआरयूएम के अंतर्गत 21 संस्थान और सीसीआरएच के अंतर्गत 6 उपचार केंद्रों वाली 27 इकाइयां। इन पहलों में अनुसूचित जाति उप योजना, जनजातीय स्वास्थ्य सेवा, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम और मोबाइल नैदानिक अनुसंधान शामिल हैं।

औषधियों के निर्माण के लिए एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) का भी प्रबंधन करता है। एएसयूएंडएच (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी) औषधियों से संबंधित मामले औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियम, 1945 के तहत शासित होते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत भारत पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। आयुष मंत्रालय ने चिकित्सा मूल्य यात्रा में भारत की स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से देश के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र के लिए चिकित्सा मूल्य यात्रा शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया। इस शिखर सम्मेलन ने आयुष- आधारित चिकित्सा मूल्य यात्रा के विस्तार के लिए राज्य सरकारों, उद्योग जगत के दिग्गजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया। 

आयुष वीजा
सरकार ने आयुष चिकित्सा पद्धति के तहत उपचार प्राप्त करने के लिए भारत आने वाले विदेशियों को आयुष वीजा की एक अलग श्रेणी शुरू की है। गृह मंत्रालय द्वारा संचालित मेडिकल और आयुष वीजा पोर्टल पंजीकृत अस्पतालों व वेलनेस केंद्रों को मेडिकल वीजा, मेडिकल अटेंडेंट वीजा और आयुष अटेंडेंट वीजा के लिए मेडिकल वीजा आमंत्रण पत्र और विस्तार पत्र बनाने की अनुमति देता है।

यह भी जानें

  • ‘आयुर्ज्ञान’ केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की गई। इसके तहत देशभर के पात्र संगठनों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित करने के लिए सहायता दी जाती है ताकि आयुष कर्मियों को आवश्यकता-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। 
  • केंद्रीय क्षेत्र योजना (आईसीएस ) के तहत मंत्रालय आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को सहायता देता है। विदेशों में आयुष अकादमिक पीठों की स्थापना और प्रशिक्षण कार्यशालाओं व संगोष्ठियों के आयोजन के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देती है।
  • स्नातक आयुर्वेद छात्रों के बीच अनुसंधान योग्यता को बढ़ावा देने के लिए स्पार्क (आयुर्वेद अनुसंधान केन के लिए छात्र कार्यक्रम) शुरू किया गया। 
  • पीजी स्टार (स्नातकोत्तर विद्वानों के लिए आयुर्वेद अनुसंधान में प्रशिक्षण योजना) से मदद दी जा रही है। पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप कार्यक्रम चलाय जा रहा है। 

आयुष मंत्रालय के उद्देश्य

  • नीति निर्माण, जागरूकता अभियान और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक और स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना।
  • आयुष क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, जिसका उद्देश्य साक्ष्य आधार को मजबूत करना, गुणवत्ता बढ़ाना और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा की वैश्विक प्रासंगिकता सुनिश्चित करना है।
  • कड़े गुणवत्ता नियंत्रण उपायों और नियामक मानकों के माध्यम से सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले आयुष उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच की गारंटी।
  • पारंपरिक भारतीय चिकित्सा की वैश्विक स्वीकृति और एकीकरण के उद्देश्य से, विनिमय कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय-स्तर पर आयुष प्रणालियों को बढ़ावा देना।
  • शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से आयुष पद्धतियों में कुशल पेशेवरों को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मानव संसाधन विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • औषधीय पौधों के क्षेत्र के विकास को समर्थन देना तथा आयुष सेवाओं और उत्पादों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना, स्थिरता लक्ष्यों के साथ संरेखित करना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

पांच रिसर्च संगठन हैं
आयुष मंत्रालय के 5 अनुसंधान संगठन, 12 राष्ट्रीय संस्था, 1 पीएसयू, 1 अधीनस्थ कार्यालय, 2 नियामक आयोग, 2 योग प्रमाणन बोर्ड (YCB) हैं।

स्वास्थ्य: आयुष मंत्रालय छह पारंपरिक उपचार प्रक्रियाओं का उपयोग करके देश भर में स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करता है।
शिक्षा: आयुष मंत्रालय देश में भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी कॉलेजों के शैक्षिक मानकों को नियंत्रित करता है।
अनुसंधान एवं विकास: आयुष मंत्रालय ने आयुष प्रणाली में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान परिषदों की स्थापना की है।
गुणवत्ता और मानक: आयुष मंत्रालय भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और होम्योपैथी औषधियों के फार्माकोपियल मानकों को विकसित करने के लिए नीतियां और नियम बनाता है।
औषधीय पौधे: आयुष मंत्रालय ने “राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी)” की स्थापना की है, जो एक शीर्ष राष्ट्रीय निकाय है जो देश में औषधीय पौधों से संबंधित सभी मामलों का समन्वय करता है।

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