ग्रीन एनर्जी में भारत का बड़ा कदम, एक मेगावॉट का प्लांट शुरू

केंद्र सरकार ग्रीन हाइड्रोजन का बिजली संयंत्र शुरू किया है। कांडला के डीपीए में एक मेगावॉट प्लांट काम करने लगा है। चार महीने में इसे फंक्शन कर दिया गया है।

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नई दिल्ली: ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के क्षेत्र में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कांडला के दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण (डीपीए) में एक मेगावॉट के हरित हाइड्रोजन विद्युत संयंत्र (Green Hydrogen Power Plant) शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया। इन्होंने इसे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
पिछले साल 26 मई भुज यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने 10 मेगावॉट के ग्रीन हाइड्रोजन की आधारशिला रखी थी। इस परियोजना के हिस्से के रूप में केवल चार महीनों के भीतर एक मेगावॉट मॉड्यूल का चालू हुआ है। 
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डीपीए ने इस विजन को वास्तविकता में बदल दिया है, जो मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत गति, पैमाने और कौशल का एक शानदार उदाहरण है।

140 मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन होगा
यह संयंत्र सालाना लगभग 140 मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने में सक्षम है और समुद्री कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्थायी बंदरगाह संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। सोनोवाल ने भारत के पहले मेक-इन-इंडिया पूर्ण-विद्युत ग्रीन टग की तैनाती का हवाला देते हुए हरित पहलों के प्रति डीपीए की निरंतर प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि यह न केवल गुजरात के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है। डीपीए में इस हरित हाइड्रोजन संयंत्र का चालू होना स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। मैं सतत समुद्री भविष्य की दिशा में इस साहसिक कदम उठाने के लिए पूरी टीम को बधाई देता हूं। 

2070 तक नेट-शून्य का है लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्रता अर्थात आत्मनिर्भरता और वर्ष 2070 तक नेट-शून्य के लक्ष्य की घोषणा की है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ग्रीन हाइड्रोजन द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आशा है। 

2030 का टारगेट
2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, जिसे लगभग 125 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि द्वारा समर्थित किया जाएगा। इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।

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