Earthquake से एंड्रॉइड अलर्ट सिस्टम बचा सकता जान, जानिए कैसे?

अगर आप भूकंप-प्रवण क्षेत्र में रहते हैं और आपके पास एंड्रॉइड फोन है, तो यह तकनीक आपकी जान बचा सकती है। गूगल का एईए अब विश्व भर में फैल चुका है।

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नई दिल्ली: रूस के कामचटका प्रायद्वीप में 8.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप (Earthquake) ने प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी को जन्म दिया है। ऐसे में अगर आप भूकंप-प्रवण क्षेत्र में रहते हैं और आपके पास एंड्रॉइड फोन है, तो यह तकनीक आपकी जान बचा सकती है। गूगल का एंड्रॉइड भूकंप अलर्ट सिस्टम (एईए), जो 2020 में अमेरिका में शुरू हुआ था, अब विश्व भर में फैल चुका है। यह सिस्टम भूकंप की शुरुआती तरंगों का पता लगाकर कुछ सेकंड पहले चेतावनी भेजता है, जिससे लोग सुरक्षित स्थान पर जा सकते हैं या दूसरों को सतर्क कर सकते हैं।

सिस्टम कैसे काम करता है?
हाल ही में एक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, यह तकनीक एंड्रॉइड फोन में मौजूद सेंसर का उपयोग करती है। ये सेंसर भूकंप की प्रारंभिक पी और एस तरंगों को पकड़ते हैं, जो भूकंप का संकेत होती हैं। जैसे ही फोन इन तरंगों को डिटेक्ट करता है, वह डेटा को गूगल के सर्वर पर भेजता है। सर्वर पर तुरंत विश्लेषण के बाद, अगर भूकंप की पुष्टि होती है, तो प्रभावित क्षेत्र में अलर्ट भेजा जाता है। चूंकि मोबाइल नेटवर्क की गति भूकंपीय तरंगों से तेज होती है, यह चेतावनी कई बार भूकंप के झटकों से पहले ही लोगों तक पहुंच जाती है।

लाखों लोगों तक पहुंचा अलर्ट
2021 से 2024 के बीच, इस सिस्टम ने 98 देशों में लाखों लोगों को भूकंप अलर्ट भेजे हैं। उदाहरण के तौर पर, 6 फरवरी 2023 को तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप से पहले लगभग छह लाख लोगों को चेतावनी मिली थी। इस अवधि में कुल 1,300 से अधिक भूकंपों के लिए अलर्ट जारी किए गए, जिनमें से केवल चार गलत थे, जिनमें से दो बिजली की गड़गड़ाहट के कारण हुए।
एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 88% उपयोगकर्ताओं ने अलर्ट के बाद भूकंप महसूस किया, जिसमें 40% को चेतावनी भूकंप शुरू होने से पहले, 25% को भूकंप के दौरान, और 20% को भूकंप के बाद मिली। हालांकि, यह सिस्टम पूरी तरह सटीक नहीं है। 2023 के तुर्की-सीरिया भूकंप में इसने तीव्रता को सही से नहीं मापा, जिसके कारण कुछ लोगों को समय पर अलर्ट नहीं मिल सका। गूगल ने बाद में अपने एल्गोरिदम को अपग्रेड किया, जिससे अब यह एक करोड़ से अधिक लोगों को समय पर चेतावनी भेज सकता है।

पारंपरिक सिस्टम का पूरक
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक पारंपरिक भूकंप चेतावनी प्रणालियों की जगह नहीं लेती, बल्कि उन्हें और प्रभावी बनाती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां कोई सरकारी चेतावनी सिस्टम नहीं है, वहां यह तकनीक जीवन रक्षक साबित हो सकती है। वर्तमान में यह सिस्टम हर महीने औसतन 65 अलर्ट भेजता है, जिससे लगभग दो करोड़ एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को लाभ मिलता है। यह तकनीक भूकंप जैसी आपदाओं में जानमाल के नुकसान को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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