नई दिल्ली: हरियाली तीज का पर्व 27 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह त्योहार पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, हरे रंग के वस्त्र और श्रृंगार करती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं। यह उत्सव प्रकृति, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक है।
हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज 26 जुलाई 2025 की रात 10:41 बजे से शुरू होकर 27 जुलाई 2025 की रात 10:41 बजे तक रहेगी। इस दिन रवि योग और शिव योग का शुभ संयोग रहेगा। पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय शाम 7:30 बजे से चंद्रोदय (रात 9:05 बजे) तक है। अन्य शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:46 से 5:30), अमृत काल (दोपहर 1:56 से 3:34), और गोधूलि मुहूर्त (शाम 7:16 से 7:38) शामिल हैं।
हरियाली तीज पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। शिवजी का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री, फूल, फल, बेलपत्र, धतूरा और भोग (मालपुआ, खीर, घेवर आदि) अर्पित करें। व्रत कथा पढ़ें, मंत्रों का जाप करें और आरती करें। अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित करें।
पूजा सामग्री
पीला वस्त्र, हरे वस्त्र, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्ते, कच्चा सूत, केले के पत्ते, जटा वाला नारियल, कलश, सुपारी, अक्षत, दूर्वा, घी, कपूर, धूप, चंदन, गंगाजल, पंचामृत, पांच प्रकार के फल, मिठाई और सोलह श्रृंगार सामग्री।
मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः।
हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि कांत कांता सुदुर्लभाम।
महत्व और परंपरा
हरियाली तीज अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में प्रेम व समृद्धि का प्रतीक है। झूला झूलना और लोकगीत गाना इसकी प्रमुख परंपराएं हैं, जो रिश्तों में ताजगी लाती हैं। यह व्रत विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के लिए सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए फलदायी है।
शुभकामना
हरियाली तीज पर शिव-पार्वती का आशीर्वाद बरसे,
सुख, प्रेम और समृद्धि से जीवन महके।



