Thailand-Cambodia Clash: शिव मंदिर को लेकर लड़ रहे दोनों देश

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह विवाद सदियों पुराना है, जो खमेर साम्राज्य (कंबोडिया) और सियाम साम्राज्य (थाईलैंड) के समय से चला आ रहा है। 19वीं और 20वीं सदी में फ्रांसीसी और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान दोनों देशों की सीमाओं को लेकर तनाव रहा।

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नई दिल्ली: थाईलैंड और कंबोडिया (Thailand-Cambodia Clash) के बीच दो प्राचीन शिव मंदिरों—प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम—को लेकर चल रहा सीमा विवाद दूसरे दिन भी गहरा गया। मीडिया सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर 12 स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं। थाईलैंड सरकार के अनुसार, इस संघर्ष के कारण 1 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

अब तक 15 थाई नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 आम लोग और 1 सैनिक शामिल हैं, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। कंबोडिया ने अभी तक अपने पक्ष से हताहतों की आधिकारिक संख्या नहीं बताई, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में एक व्यक्ति के मारे जाने की बात सामने आई है। थाईलैंड ने कंबोडिया से सटी सीमा के 8 जिलों में मार्शल लॉ लागू कर दिया है।

थाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जब तक कंबोडिया अपनी आक्रामक कार्रवाइयां नहीं रोकता, तब तक युद्धविराम की बातचीत संभव नहीं है। इस तनाव के बीच, थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने एक यात्रा परामर्श जारी किया है, जिसमें भारतीय नागरिकों से थाईलैंड-कंबोडिया सीमा के पास 7 प्रांतों—उबोन रत्चथानी, सुरिन, सिसाकेत, बुरीराम, सा काओ, चंथाबुरी और ट्राट—में यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

मंदिर विवाद का इतिहास
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह विवाद सदियों पुराना है, जो खमेर साम्राज्य (कंबोडिया) और सियाम साम्राज्य (थाईलैंड) के समय से चला आ रहा है। 19वीं और 20वीं सदी में फ्रांसीसी और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान दोनों देशों की सीमाओं को लेकर तनाव रहा। 1907 में फ्रांस के अधीन कंबोडिया के साथ 817 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा खींची गई थी। इस नक्शे में प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया, जिसका थाईलैंड ने विरोध किया। वहीं, ता मुएन थॉम मंदिर थाईलैंड के हिस्से में दिखाया गया, लेकिन कंबोडिया इसे अपना ऐतिहासिक हिस्सा मानता है।

ता मुएन थॉम मंदिर पर दावे
ता मुएन थॉम मंदिर सीमा के एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां सीमा रेखा स्पष्ट नहीं है। कंबोडिया का दावा है कि यह मंदिर खमेर साम्राज्य (9वीं से 15वीं सदी) के समय का है और उसका हिस्सा है। दूसरी ओर, थाईलैंड का कहना है कि मंदिर भले ही कंबोडिया का हो, लेकिन इसके आसपास की जमीन पर उसका अधिकार है। इस क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं नियमित गश्त करती हैं, जिसके चलते अक्सर तनाव बढ़ जाता है। इस बार की झड़पें भी ता मुएन थॉम मंदिर के पास शुरू हुईं।

प्रीह विहियर मंदिर का विवाद
प्रीह विहियर मंदिर को लेकर विवाद और गहरा है। 1959 में कंबोडिया ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में उठाया। 1962 में कोर्ट ने फैसला दिया कि मंदिर कंबोडिया का है और थाईलैंड को अपने सैनिकों को वहां से हटाने का आदेश दिया। थाईलैंड ने फैसले को स्वीकार किया, लेकिन मंदिर के आसपास की जमीन पर अपना दावा बनाए रखा। 2008 में यूनेस्को द्वारा प्रीह विहियर को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के बाद तनाव और बढ़ गया। 2011 में हिंसक झड़पों के कारण हजारों लोग विस्थापित हुए। 2013 में ICJ ने स्पष्ट किया कि मंदिर और उसका आसपास का क्षेत्र कंबोडिया का है, लेकिन सीमा विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं सका।

वर्तमान संघर्ष की शुरुआत
पिछले दो महीनों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ रहा था। 28 मई को एमरॉल्ड ट्राइंगल—जहां थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की सीमाएं मिलती हैं—पर झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हुई थी। गुरुवार को स्थिति तब और बिगड़ गई, जब कंबोडियाई सेना के अनुसार, थाई सैनिकों ने ता मुएन थॉम मंदिर की ओर बढ़कर वहां कंटीले तार लगाए और ड्रोन के साथ हवाई फायरिंग की। थाईलैंड का दावा है कि कंबोडियाई सैनिकों ने पहले आक्रामक कार्रवाई शुरू की। थाईलैंड ने बातचीत से तनाव कम करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर गोलीबारी शुरू हो गई।

राजनीतिक उथल-पुथल
15 जून को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने कंबोडिया के नेता हुन सेन से फोन पर बात की थी, जिसमें उन्होंने थाई सेना के कमांडर की आलोचना की थी। इस बातचीत के लीक होने के बाद थाईलैंड में जनता और सेना के बीच आक्रोश फैल गया। थाई सेना का देश में गहरा प्रभाव है, और इस घटना के बाद कोर्ट ने पाइतोंग्तार्न को पद से हटा दिया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी का मकसद केवल विवाद सुलझाना था, लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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