नई दिल्ली: देश के किसी भी कोने में भूकंप, तूफान या भारी बारिश का अंदाजा अब पहले ही लगाया जा सकेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MOES) ने ऐसी चेतावनी प्रणाली (वॉर्निंग सिस्टम) विकसित की है, जो समय से पहले चक्रवात, भारी बारिश और दूसरी गंभीर मौसम की घटनाओं की जानकारी दे देगी। हालांकि, भूकंप की सटीक भविष्यवाणी अभी नहीं की जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में इसकी जानकारी दी है। डॉ सिंह के मुताबिक, हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अन्य केंद्रों के साथ तालमेल कर एक संपूर्ण जीआईएस-आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) विकसित की है। यह चक्रवात समेत दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना देगा। इससे मौसमी खबरों का समय से पता चल जाएगा। वहीं, निगरानी सिस्टम भी बेहतर तरीके से काम कर सकेगा।
यह विशिष्ट गंभीर मौसम मॉड्यूलों से समर्थित है, जो चक्रवात, भारी बारिश समेत दूसरी विषम मौसम घटनाओं के लिए समय पर प्रभाव-आधारित प्रारंभिक चेतावनी देगा। इसमें अतीत के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है। साथ ही भारतीय क्षेत्र और इसके पड़ोसी क्षेत्रों के लिए उपलब्ध वास्तविक समय की सतह और ऊपरी हवा के मौसम संबंधी अवलोकन भी शामिल हैं। इसमें हर 10 मिनट पर रडार और हर 15 मिनट पर उपग्रह से मिले डेटा भी शामिल हैं। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थानों में संचालित मॉडलों के समूह से संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान परिणामों का भी उपयोग करता है। इनमें अति-स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मॉडल शामिल हैं।
जानें खासियत
यह सिस्टम अत्याधुनिक नेटवर्क से लैस है। इसमें धरती की सतह, ऊपरी हवा, रिमोट सेंसिंग अवलोकन, उच्च-रिजॉल्यूशन गतिशील मॉडल पर आधारित निर्बाध पूर्वानुमान प्रणाली और अलर्ट और चेतावनी उत्पन्न करने के लिए जीआईएस-आधारित उपकरण शामिल हैं। सूचना का समय पर और प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने के लिए पूरे सिस्टम को आधुनिक दूरसंचार टेक्नीक से एकीकृत किया गया है।
दुनिया में भूकंप की सटीक भविष्यवाणी कहीं नहीं
फिलवक्त पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसी कोई वैज्ञानिक तकनीक मौजूद नहीं, जो समय, स्थान और परिमाण के संदर्भ में भूकंप की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इसलिए देश में भूकंप की पूर्व चेतावनी देने के लिए कोई प्रमाणित प्रणाली मौजूद नहीं है। मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केन्द्र (एनसीएस) अपने भूकंपीय नेटवर्क के माध्यम से देश में और इसके आसपास आने वाले भूकंपों की निगरानी कर रहा है तथा तीव्रता मानचित्र के साथ भूकंप की घटना के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
बाढ़ आने वाली है, पहले से होगा पता
मंत्री ने बताया कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) को पहचान की गई जगहों पर संबंधित राज्य सरकारों को 24 घंटे तक लघु अवधि के बाढ़ पूर्वानुमान जारी करने का अधिकार दिया गया है। एक निश्चित सीमा तक पहुंचने के बाद समय पर बाढ़ पूर्वानुमान जारी किए जा रहे हैं। देश में बाढ़ के हालात से जुड़ी जानकारी और मोबाइल फोन से सात दिनों इसके पूर्वानुमान जारी करने के मकसद से आयोग ने ‘फ्लडवॉच इंडिया’ मोबाइल एप्लिकेशन का 2.0 संस्करण विकसित किया है।
खतरनाक मौसमी घटनाएं आप भी देख सकते हैं
केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में कहा कि आईएमडी ने 13 सबसे खतरनाक मौसम संबंधी घटनाओं के लिए एक वेब-आधारित ऑनलाइन ‘भारत का जलवायु खतरा और अतिसंवेदनशी मानचित्रावली’ तैयार की है। इसे यहां पर देखा जा सकता है। यह एटलस राज्य सरकार की संस्थाओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हॉटस्पॉट की पहचान करने तथा विषम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए योजना बनाने और उचित कार्रवाई करने में मदद करेगा।
ऐसे खुद लगाए पता कि कैसा रहेगा मौसम
आईएमडी ने आम लोगों के उपयोग के लिए ‘उमंग’ मोबाइल ऐप के साथ अपनी सात सेवाएं (वर्तमान मौसम, नाउकास्ट, शहर पूर्वानुमान, वर्षा सूचना, पर्यटन पूर्वानुमान, चेतावनी और चक्रवात) शुरू की हैं। इसके अलावा, आईएमडी ने मौसम पूर्वानुमान के लिए ‘मौसम’, कृषि मौसम संबंधी सलाह के प्रसार के लिए ‘मेघदूत’ और बिजली की चेतावनी के लिए ‘दामिनी’ नामक मोबाइल ऐप विकसित किया है।
प्राकृतिक आपदाएं
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सहित उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में वैश्विक चक्रवात आवृत्ति का लगभग 7% हिस्सा आता है।
- 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन के कारण ओडिशा में 10,000 लोगों की मौत हुई थी।
- 2023 में गुजरात तट पर चक्रवात बिपरजॉय और 2024 में ओडिशा तट पर चक्रवात दाना आया था। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था।



