कोन से मुस्लिम शासक ने जारी रखी हिंदू परंपरा ?

Sep  29, 2025

By Sakshi Pal

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मैसूर का दशहरा सिर्फ़ एक उत्सव नहीं, यह टीपू सुल्तान की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।

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दशहरा की शुरुआत 17वीं सदी में हिंदू वाडियार राजवंश ने की थी।

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18वीं सदी में (1782-1799), टीपू सुल्तान ने मैसूर पर शासन किया। वाडियार राजवंश सिर्फ़ नाम का रह गया था।

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"मैसूर का शेर" कहलाने वाले टीपू ने धार्मिक सहिष्णुता दिखाते हुए इस हिंदू परंपरा का सम्मान किया।

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टीपू के शासनकाल में भी दशहरा को एक राजकीय समारोह के रूप में मनाया गया, जिसमें बड़े सैन्य प्रदर्शन होते थे।

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टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम में भी दशहरा उत्सव मनाया जाता था, जो मैसूर के उत्सव से जुड़ा था।

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आज दशहरा का केंद्र मैसूर महल टीपू के समय में शाही और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र था।

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दशहरा का शाही जुलूस (जंबू सवारी) आज भी टीपू के समय की शाही भव्यता और परंपराओं को ज़िंदा रखता है।

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मैसूर दशहरा शाही इतिहास और सांस्कृतिक समन्वय की एक अनूठी मिसाल है, जो आज भी कायम है।

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